Tuesday, January 20, 2026
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यूपी: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की बढ़ीं मुश्किलें, नोटिस जारी कर पूछा गया- आप नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लिख रहे?

प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस जारी कर पूछा है कि आप अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं?

Reported By : Imran Laeek Written By : Rituraj Tripathi Published : Jan 20, 2026 02:04 pm IST, Updated : Jan 20, 2026 02:11 pm IST
Swami Avimukteshwaranand Saraswati - India TV Hindi
Image Source : PTI स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

प्रयागराज: यूपी के प्रयागराज से बड़ी खबर है। मौनी अमावस्या पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। इस बीच देर रात प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे में जवाब मांगा गया है।

क्या है मामला?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन ब्रह्मलीन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के लंबित मुकदमे का जिक्र किया गया है।

इस नोटिस में पूछा गया है कि आप खुद को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील का भी उल्लेख किया गया है जिसमें न्यायालय ने आदेश दिया था कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।

नोटिस में अपील संख्या का जिक्र करते हुए लिखा गया है, "प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रश्नगत अपील निस्तारित नहीं कर दी जाती या कोई अग्रिम आदेश पट्टाभिषेक के संबंध में पारित नहीं कर दिया जाता, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।"

नोटिस में कहा गया है, "माघमेले में आप द्वारा अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित/प्रदर्शित किया गया है। आपने इस कृत्य/प्रदर्शन से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवेहलना दर्शित हो रही है। इसलिए आप 24 घंटे के अंदर ये स्पष्ट करें कि आप द्वारा अपने नाम के सम्मुख शंकराचार्य शब्द का प्रयोग या अपने को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में प्रचारित/प्रसारित कैसे किया जा रहा है?"

 Swami Avimukteshwaranand Saraswati

Image Source : REPORTER INPUT
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नोटिस को लेकर क्या कहा?

इस मामले पर अपना पक्ष रखने के लिए अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रेस क्रॉन्फ्रेंस बुलाई है। इसके अलावा अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है, "प्रशासन ये नहीं तय करेगा कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं है। भारत के राष्ट्रपति भी शंकराचार्य नहीं तय कर सकते, शंकराचार्य वही हैं, जिनको तीनों  शंकराचार्य मानें और 2 पीठ के शंकराचार्य हमको लेकर पिछले माघ मेले में स्नान कर चुके हैं।"

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने पद की वैधता को लेकर स्पष्ट कहा कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार वही व्यक्ति शंकराचार्य होता है, जिसे अन्य पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं। उन्होंने बताया कि शृंगेरी और द्वारका पीठ के शंकराचार्य उन्हें विधिवत स्वीकार करते हैं और पिछले माघ मेले में उनके साथ शाही स्नान भी कर चुके हैं, जबकि पुरी पीठ के शंकराचार्य ने भी उनके विरुद्ध कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है और सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में भी विरोध का कोई उल्लेख नहीं है। 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि किसी भी प्रशासनिक अधिकारी, मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि शंकराचार्य कौन है, क्योंकि यह धर्म का आंतरिक विषय है, जिसका निर्णय केवल शंकराचार्य परंपरा के अनुसार ही हो सकता है। उन्होंने स्वयं को ज्योतिष्पीठ का निर्विवाद शंकराचार्य बताते हुए कहा कि जो लोग उनके पद पर सवाल उठा रहे हैं, वे दूषित भावना से प्रेरित हैं और यदि कोई अन्य व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य मानता है तो वह सामने आकर शास्त्रार्थ या खुली चर्चा करे।

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