Tuesday, January 20, 2026
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बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नबीन, अब सामने हैं ये 5 बड़े चैलेंज

बीजेपी ने 45 वर्षीय नितिन नबीन को सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना है। उनके सामने अब कई बड़ी चुनौतियां हैं जिनमें बंगाल और असम में होने वाले चुनाव, दक्षिण भारत में विस्तार और GEN-Z का भरोसा बनाए रखना शामिल हैं।

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
Published : Jan 20, 2026 02:10 pm IST, Updated : Jan 20, 2026 02:39 pm IST
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Image Source : PTI बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने अपने कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन को पार्टी का 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया है। 45 साल के नबीन बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह बिहार के पहले नेता हैं जो इस पद पर पहुंचे हैं। 5 बार विधायक रह चुके नबीन की छवि एक ग्राउंड वर्कर की है और पार्टी संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। बीजेपी का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब करीब 2 महीने बाद बंगाल और असम में चुनाव होने हैं। उसके बाद केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की बारी आएगी। बीजेपी के लिए ये राज्य मुश्किल पिच साबित हो सकते हैं। आइए, जानते हैं कि अध्यक्ष बनते ही नितिन नबीन के सामने 5 सबसे बड़ी चुनौतियां कौन सी हैं:

चुनौती नंबर-1: बंगाल फतह की जिम्मेदारी

बंगाल में बीजेपी के लिए जीत हासिल करना नितिन नबीन की सबसे बड़ी चुनौती होगी। करीब 2 से 3 महीने बाद होने जा रहे इस चुनाव में पार्टी को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है। पिछले चुनाव में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन सत्ता से दूर रह गई थी। अब नबीन को ग्रामीण इलाकों में पैठ बढ़ानी होगी, जहां टीएमसी की पकड़ मजबूत है। वे बंगाल के स्थानीय मुद्दों जैसे बेरोजगारी, विकास और सांस्कृतिक पहचान पर फोकस कर सकते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करना भी एक बड़ी चुनौती होगी। अगर बंगाल में जीत मिलती है तो यह बीजेपी की पूर्वी भारत में विस्तार की बड़ी कामयाबी होगी। नबीन की ग्राउंड वर्कर छवि यहां मददगार साबित हो सकती है, लेकिन विपक्ष के तिकड़मों से निपटना काफी चुनौतीपूर्ण रहेगा।

चुनौती नंबर-2: असम में जीत की हैट्रिक लगाना

असम में बीजेपी को लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कराना नितिन नबीन के लिए दूसरी बड़ी चुनौती है। अगले कुछ ही महीने बाद होने वाले चुनाव में पार्टी को कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों से मुकाबला करना पड़ेगा। असम में बीजेपी ने 2016 और 2021 में सरकार बनाई थी, लेकिन अब नागरिकता कानून समेत कई अन्य मुद्दों पर काफी विवाद हो रहा है। नबीन को आदिवासी और चाय बागान मजदूरों के बीच समर्थन बनाए रखना होगा। सहयोगी पार्टियों के साथ तालमेल बनाना भी नितिन नबीन की अहम जिम्मेदारी होगी। अगर असम में जीत की हैट्रिक लगी तो पूर्वोत्तर में बीजेपी की और मजबूत नजर आएगी। नितिन नबीन की संगठनात्मक पकड़ असम में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में फायदेमंद साबित हो सकती है।

Nitin Nabin, Nitin Nabin Challenges

Image Source : INDIA TV
नितिन नबीन के सामने हैं ये 5 बड़ी चुनौतियां।

चुनौती नंबर-3: दक्षिण भारत में 'कमल' खिलाना

दक्षिण भारत में बीजेपी का विस्तार करना नितिन नबीन की तीसरी चुनौती होगी। बंगाल-असम चुनाव के बाद केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव होंगे, जहां पार्टी की मौजूदगी कमजोर है। तमिलनाडु में डीएमके-एआईएडीएमके का दबदबा है, जबकि केरल में लेफ्ट और कांग्रेस मजबूत हैं। पुडुचेरी में भी स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं। इन सभी राज्यों में नितिन नबीन को हिंदुत्व के अलावा स्थानीय भाषा, संस्कृति और विकास के मुद्दों पर फोकस करना होगा। नितिन नबीन खुद युवा हैं और वह युवा कार्यकर्ताओं को जोड़कर ग्राउंड लेवल पर काम कर सकते हैं। अगर दक्षिण भारत में 'कमल' खुलकर खिल सका तो यह बीजेपी के लिए ऐतिहासिक होगा। अब देखना यह है कि दक्षिण की चुनौती से नितिन नबीन कैसे निपटते हैं।

चुनौती नंबर-4: GEN-Z का भरोसा बनाए रखना

युवा पीढ़ी यानी GEN-Z का भरोसा बनाए रखना नितिन नबीन के समाने चौथी बड़ी चुनौती है। 45 साल के नबीन खुद युवा हैं, लेकिन GEN-Z से जुड़ने के लिए पार्टी को सोशल मीडिया और आधुनिक मुद्दों पर ज्यादा एक्टिव होना होगा। GEN-Z रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण और डिजिटल अधिकारों पर फोकस करता है, और आगामी चुनावों में उनका वोट निर्णायक हो सकता है। नितिन नबीन को युवा विंग को मजबूत करना होगा, कैंपस में कैंपेन चलाने होंगे। वह मोदी सरकार की योजनाओं जैसे स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट को हाईलाइट कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर फेक न्यूज से लड़ना भी एक अहम चुनौती होगी। नितिन नबीन की ग्राउंड वर्कर इमेज उन्हें  GEN-Z के करीब ला सकती है।

चुनौती नंबर-5: एनडीए को एकजुट रखना

एनडीए गठबंधन को एकजुट रखना नितिन नबीन की पांचवीं और अंतिम बड़ी चुनौती होगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले इस गठबंधन में कई क्षेत्रीय पार्टियां हैं, जैसे शिवसेना , जेडीयू, TDP, LJP और अन्य। आने वाले दिनों में चुनावों से पहले मतभेद उभर सकते हैं, खासकर सीट बंटवारे पर। ऐसे में नितिन नबीन को सभी सहयोगियों से बातचीत करनी होगी, उनकी मांगों पर एक संतुलित रुख अपनाना होगा। मोदी की लोकप्रियता पर निर्भर रहते हुए भी, नबीन की संगठनात्मक क्षमता यहां काम आएगी।

बीजेपी को नितिन नबीन से हैं काफी उम्मीदें

45 साल के युवा नेता नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने युवाओं के और करीब जाने की कोशिश की है। पार्टी के नितिन नबीन के कार्यकाल से काफी उम्मीदें हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपना पूरा समर्थन देने की बात कही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नितिन नबीन को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी और कहा कि पार्टी से संबंधित मामलों में यह युवा नेता उनका ‘बॉस’ होगा। पीएम मोदी ने नबीन को एक ‘मिलेनियल’ बताया, जो उस पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं जिसने भारत में बहुत सारे बदलाव देखे हैं। यह दिखाता है कि बीजेपी ने कितनी उम्मीदों के साथ नितिन नबीन के हाथों में नेतृत्व की बागडोर सौंपी है।

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