Ajab Gajab: भारत में कॉर्पोरेट जगत में 'दु:ख' या तनाव कई कारणों से है, जिनमें अत्यधिक काम का दबाव, अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा, खराब कार्य-जीवन संतुलन, माइक्रोमैनेजमेंट, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि और घटते कॉर्पोरेट निवेश व आर्थिक अनिश्चितता शामिल हैं, जिससे कर्मचारियों में चिंता और अवसाद बढ़ रहा है, और कंपनियों को धोखाधड़ी व नैतिक मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। इसी तनाव के शिकार एक 29 वर्षीय सॉफ्टवेयर डेवलपर की कहानी इन दिनों काफी वायरल हो रही है। दावा है कि, क्रिसमस-नए साल की छुट्टियों के दौरान अपने मैनेजर के मैसेज का जवाब न देने के कारण उसे नौकरी से निकाल दिया गया, जिससे कार्यस्थल की सीमाओं और कर्मचारियों के अधिकारों के बारे में ऑनलाइन बहस छिड़ गई है।
रेडिट पोस्ट वायरल
रेडिट पर इस पोस्ट को रेडिट पर No_Guide_4276 नामक हेंडल से शेयर किया गया था। 'छुट्टियों के दौरान मैनेजर के मैसेज का जवाब न देने की वजह से सॉफ्टवेयर की नौकरी से निकाल दिया गया' शीर्षक से पोस्ट में, टेक्नीशियन ने बताया कि उसे बिना किसी चेतावनी या परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान के नौकरी से निकाल दिया गया। उसने आरोप लगाया कि छुट्टियों के दौरान खराब फोन कनेक्टिविटी वाले एक दूरस्थ, पहाड़ी इलाके में यात्रा करते समय मैसेज का जवाब न देने पर उसके मैनेजर को बुरा लगा। शख्स ने लिखा कि, 'हाय, मैं 29 साल का हूं और हाल ही में अपने मैनेजर के अहंकार के कारण सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी से निकाल दिया गया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा कुछ लिखना पड़ेगा, लेकिन आखिरकार मुझे लिखना ही पड़ रहा है। मेरे पास आय का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं है। मुझे कोई चेतावनी या पीआईपी भी नहीं दिया गया। उन्हें बस इस बात से तकलीफ है कि मैंने क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के दौरान उनके संदेशों का जवाब नहीं दिया, क्योंकि सभी की छुट्टियां थीं और मैं शहर से बाहर कहीं घूमने गया था। कुछ दिनों तक ऊंचाई पर होने के कारण मेरे फोन में सिग्नल नहीं आ रहा था, उन्हें लगा कि मैंने जानबूझकर फोन बंद कर दिया (मैनेजमेंट की सोच कितनी घटिया है)। असल में, उनके अहंकार की वजह से ही मैं इस स्थिति में फंसा हूं।'

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर यूजर्स की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं, जिन्होंने सलाह और अपने मिलते-जुलते अनुभव साझा किए। एक यूजर ने पोस्ट करने वाले व्यक्ति से 'श्रम आयुक्त को पत्र लिखने' का आग्रह किया। दूसरे ने लिखा कि, 'यह स्वीकार करना दुखद है, लेकिन नौकरी के मामले में हम कहीं न कहीं आज भी गुलाम हैं। इसलिए सबसे अच्छा विकल्प यही है कि कंपनी/संस्कृति या प्रबंधक के अनुरूप काम करें, या इतना अच्छा प्रदर्शन करें कि वे आपकी जगह किसी और को न रख सकें, या अगर रख भी लें तो कुछ समय में दूसरी नौकरी ढूंढ़ लें। मैं यहां के दर्द और दुख को समझता हूं, लेकिन दुख की बात है कि हम इसी गुलामी को बढ़ावा दे रहे हैं।' तीसरे ने लिखा कि, 'आप उनकी बर्खास्तगी की सूची में थे, लेकिन वे एक कारण की तलाश कर रहे थे और उन्हें आपको बर्खास्त करने का एक छोटा सा कारण मिल गया।' चौथे यूजर ने लिखा कि, 'भारतीय मैनेजर्स का अहंकार बेहद संवेदनशील होता है। लेकिन चूंकि वरिष्ठ नेतृत्व पर उनका काफी दबदबा और प्रभाव होता है, इसलिए अगर आप किसी प्रबंधक के अहंकार को चुनौती देंगे, तो वह आपको इसका खामियाजा भुगतने पर मजबूर कर देगा। मैंने खुद 2024 में इसका अनुभव किया है। सबसे अच्छा तरीका यही है कि जब तक बेहद जरूरी न हो, टकराव से बचा जाए।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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