Railway Interesting Facts: भारतीय रेलवे अपने अभूतपूर्व कार्यों के लिए दुनिया भर में विख्यात हो चुका है। रेलवे ट्रेनों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से और उन्नत बनाकर यात्रियों के सफर के आनंद को भी दो गुना कर रहा है। यही वजह है कि, जब कोई विदेशी यात्री भारतीय ट्रेनों में सफर करता है तो उसकी सुविधाओं और संचालन से वे काफी इंप्रेस होते हैं और फिर उस बात को अपने व्लॉग में बताकर वायरल कर देते हैं। ये बात नहीं है कि, भारत का रेल नेटवर्क केवल सहूलियत और सुविधाएं देने के लिए विश्वविख्यात है बल्कि, भारतीय रेलवे अद्वितीय इंजीनिरिंग को लेकर भी काफी फेमस है जो कि काफी चौंकाने वाली चीज है। अब रेल की पटरियों ही ले लीजिए, क्या ट्रेन में सफर करते हुए आपने कभी सोचा है कि, रेलवे ट्रैक की पटरियों में कभी जंग क्यों नहीं लगती ? यदि आपको नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताने वाले हैं :
रेलवे की शानदार इंजीनियरिंग को ऐसे समझें
भारतीय रेलवे दुर्गम भूभागों में बने प्रतिष्ठित पुलों से लेकर माल ढुलाई गलियारों और हाई-स्पीड रेल तक आधुनिक रेलवे नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। ये परियोजनाएं भारत की बढ़ती इंजीनियरिंग क्षमता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) है। यह एक अत्यंत रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। लगभग ₹44,000 करोड़ की लागत से निर्मित , 272 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन हिमालयी क्षेत्र से होकर गुजरती है। इस परियोजना में चिनाब रेल पुल भी शामिल है, जो विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे मेहराबदार पुल है। यह नदी से 359 मीटर ऊपर स्थित है, जो एफिल टॉवर से भी ऊंचा है। यह 1,315 मीटर लंबा स्टील मेहराबदार पुल है जिसे भूकंप और हवा की स्थितियों का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ट्रेन की पटरियां चोरी क्यों नहीं होतीं
गौरतलब है कि, रेलवे की पटरियां स्लीपर्स की मदद से ढंग से बांधी जाती हैं जिसकी वजह से ये आसानी से नहीं खोली जा सकती हैं। एक और बात ये भी है कि, रेलवे की पटरियां शुद्ध लोहा नहीं होतीं और ये मिश्र धातु से बनाई जाती हैं जिसकी वजह से इनको काटना लगभग असंभव है।
कैसे बनती हैं ट्रेन की पटरियां
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेलवे ट्रैक आमतौर पर हाई क्वालिटी वाले हॉट-रोल्ड स्टील, कार्बन-मैंगनीज स्टील से बनाए जाते हैं। इनको उच्च शक्ति, घिसाव प्रतिरोध और टिकाऊपन के लिए जाना जाता है। ट्रेन की पटरियां प्राय: 60 kg/m या 52 kg/m में उलब्ध होती हैं जिनको भारी वजन और हर जलवायु परिस्थिति का सामना करने के लिए आकार दिया जाता है।

रेलवे ट्रैक की पटरियों में जंग क्यों नहीं लगती है
कई रिपोर्ट्स में इस बात का उल्लेख मिलता है कि, रेलवे ट्रैक पर बिछी पटरियों में जंग लगने के केस काफी कम सामने आते हैं। जैसा कि हमने बताया इनको टिकाऊ स्टील मिश्र धातु से बनाया जाता है। इसमें करीब 1 प्रतिशत कार्बन और 12 प्रतिशत मैंगनीज होता है। यही वजह है कि, इसमें ऑक्सीकरण नहीं होता है या न के बराबर होता है जो कि पटरियों को जंग लगने से रोकने में मदद करता है। इसके अलावा, ट्रेन के पहियों के लगातार घर्षण और भार से होने वाली पॉलिशिंग सतह पर लगी जंग को हटा देती है और गहरी संरचनात्मक जंग को रोकती है। यदि ट्रेन की पटरी साधारण लोहे की बनी हुई हो तो हवा की नमी की वजह से उसमें जंग लग सकती है। ऐसे में पटरी को बार-बार बदलना पड़ेगा और इसमें लागत भी काफी आती है। इतना ही नहीं, इससे रेल दुर्घटनाओं की संभवना भी बढ़ सकती है। दरअसल, इस लोहे में कार्बन की मात्रा कम होती है, जिससे इसमें जंग लगने की संभावना कम हो जाती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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