नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी मलेशिया यात्रा के दौरान भारत डोर्नियर विमान बेचने की भी प्लानिंग कर रहा है। बता दें कि पीएम मोदी 7-8 फरवरी को मलेशिया की 2 दिन की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। इस दौरान भारत और मलेशिया के बीच रक्षा क्षेत्र में बड़े सहयोग की संभावनाएं दिख रही हैं। विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी (ईस्ट) पेरियासामी कुमारन ने गुरुवार को इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि भारत मलेशिया को डोर्नियर विमान बेचने, स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के मिडलाइफ अपग्रेड और एसयू-30 विमानों के रखरखाव और रेट्रोफिटिंग पर बातचीत करने की योजना बना रहा है।
'डोर्नियर विमान की बिक्री पर है नजर'
पी. कुमारन ने कहा, 'रक्षा सहयोग के मामले में बहुत संभावनाएं हैं। हम डोर्नियर विमान की बिक्री पर नजर रखे हुए हैं। मलेशिया के पास भी स्कॉर्पीन पनडुब्बियां हैं और वे मिडलाइफ अपग्रेड तथा रेट्रोफिटिंग में सहयोग की तलाश कर रहे हैं।' उन्होंने आगे बताया कि दोनों देशों के पास एसयू-30 विमान हैं, इसलिए भारत ने इनके रेट्रोफिटिंग और मिडलाइफ मेनटेनेंस के प्रस्ताव दिए हैं। इसके अलावा, भारतीय शिपयार्ड से नौसैनिक प्लेटफॉर्म की सप्लाई की भी संभावना तलाशी जा रही है।
भारत-मलेशिया के बीच मजबूत रक्षा संबंध
बता दें कि भारत-मलेशिया रक्षा संबंध पिछले कई सालों से मजबूत होते जा रहे हैं। 1993 में रक्षा सहयोग पर हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की नींव है। यह समझौता संयुक्त उद्यम, संयुक्त विकास परियोजनाओं, खरीद, लॉजिस्टिक्स, रखरखाव सहायता और प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने की अनुमति देता है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा अगस्त 2024 में मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप स्तर पर ले जाने के 1.5 साल बाद हो रही है।
भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है मलेशिया
मलेशिया भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, विजन MAHASAGAR और इंडो-पैसिफिक विजन में महत्वपूर्ण साझेदार है। इस यात्रा से भारत की आसियान क्षेत्र के साथ जुड़ाव भी बढ़ेगा, क्योंकि मलेशिया आसियान का संस्थापक सदस्य है और 2025 में इसकी अध्यक्षता कर रहा है। दोनों प्रधानमंत्री इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय चर्चा करेंगे और कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत प्रगति की समीक्षा करेंगे। मुख्य रूप से इस दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा आदि पर चर्चा हो सकती है।


