पश्चिम बंगाल की सरज़मीन पर 2026 के विधानसभा चुनावों की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। सियासत के इस बाजार में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा SIR यानी मतदाता सूची के पुनरीक्षण की है। ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। इस बीच, पश्चिम बंगाल में 'मुस्लिम फैक्टर' पर भी चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में आइए जातने हैं कि राज्य में मुस्लिम आबादी कितनी है और ये कितनी सीटों पर 'किंगमेकर' की भूमिका में हैं?
बंगाल में मुस्लिम आबादी
पश्चिम बंगाल में करीब 30% मुस्लिम आबादी है। वहीं, बंगाल विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं, जिनमें लगभग 40 से 50 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम मतदाता पूरी तरह से 'किंगमेकर' की भूमिका में हैं। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना और बीरभूम जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी का घनत्व सबसे अधिक है। कई निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी 50% से अधिक है, ऐसे में यह वोट बैंक जिस तरफ झुकता है, जीत उसी की मानी जाती है।
पिछले चुनाव के क्या रहे नतीजे?
गौरतलब है कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC ने एकतरफा जीत हासिल की थी। कुल 294 में 292 सीटों पर हुए चुनाव में TMC ने 213 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। इस चुनाव में TMC का वोट शेयर लगभग 48% रहा।
दूसरी ओर, बीजेपी राज्य में मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी और उसने 77 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं, दशकों तक बंगाल की राजनीति पर राज करने वाले वामपंथी और कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। ये पार्टियां अपना खाता भी नहीं खोल पाई। केवल इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) ने गठबंधन की ओर से 1 सीट जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

292 सीटों पर चुनाव क्यों हुआ था?
मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों- शमशेरगंज और जंगीपुर पर चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों की मतदान से पहले मृत्यु हो गई थी। शमशेरगंज से कांग्रेस उम्मीदवार रज़ाउल हक और जंगीपुर से रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार प्रदीप नंदी का निधन कोरोना संक्रमण के कारण हो गया था।
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