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तस्वीरें लेने के चक्कर में गई जान, बर्फीले पहाड़ से गिरकर पर्वतारोही की मौत; देखें VIDEO

 Published : Oct 07, 2025 01:55 pm IST,  Updated : Oct 07, 2025 01:55 pm IST

चीन में पहाड़ की चोटी से गिरकर एक पर्वतारोही की मौत हो गई है। पर्वतारोही का नाम होंग था। इस घटना का वडियो भी सामने आया है। यह घटना माउंट नामा की चोटी पर हुई है।

China Mountaineer Dies After Falling From Mountain - India TV Hindi
China Mountaineer Dies After Falling From Mountain Image Source : @DREAMSNSCIENCE/ X

China Mountaineer Death: चीन के सिचुआन प्रांत में माउंट नामा पर एक पर्वतारोही की दर्दनाक मौत हुई है। हादसा उस वक्त हुआ जब पर्वतारोही ने चोटी के पास तस्वीरें लेने के लिए कथित तौर पर अपनी सुरक्षा रस्सी खोल दी। सुरक्षा रस्सी खुलने की वजह से पर्वतारोही का संतुलन बिगड़ गया और वह लुढ़कता हुआ पहाड़ से नीचे जा गिरा। 

पर्वतारोही ने हटा दी थी सुरक्षा रस्सी

चैनल न्यूज एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, 31 वर्षीय होंग 25 सितंबर को 18,332 फीट (5,588 मीटर) ऊंचे पर्वत पर चढ़ने वाले एक पर्वतारोही समूह का हिस्सा थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब होंग बर्फ से ढकी ढलान पर फिसले, तब उन्होंने अपनी सुरक्षा रस्सी हटा दी थी और बर्फ काटने वाली कुल्हाड़ी का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे।

देखें वीडियो

जिस तरह के वीडियो सामने आए हैं उसमें होंग को शिखर के पास एक बर्फ से ढकी ढलान के पास बिना सुरक्षा रस्सी के खड़े दिखाया गया है। जैसे ही उन्होंने अपना संतुलन बनाने की कोशिश की, उनका पैर लड़खड़ा गया। अगले ही पल, वो पहाड़ी से नीचे फिसल गए।

होंग के ग्रुप ने नहीं लिया था परमिट

चीनी मीडिया आउटलेट रेड स्टार न्यूज के अनुसार अधिकारी घटना की जांच कर रहे हैं। होंग के रिश्तेदारों ने सीएनए को बताया कि वो पहली बार पहाड़ पर आए थे। अधिकारियों ने कहा कि होंग और उनके समूह ने अपनी चढ़ाई की योजना साझा नहीं की थी और ना ही आवश्यक परमिट प्राप्त किए थे। दुर्घटना के बाद, स्थानीय अधिकारी तुरंत उन्हें बचाने के लिए पहुंचे।

गोंगगा पर्वत श्रृंखला का हिस्सा नामा पीक

माउंट नामा, जिसे नामा पीक भी कहा जाता है, सिचुआन प्रांत के पूर्वी तिब्बती पठार में एक ऊंचा पर्वत है। यह गोंगगा पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। यहां योजना के अनुसार ट्रैक के लिए उचित तैयारी जरूरी होती है। पर्वतारोहियों को परमिट की आवश्यकता होती है और उन्हें स्थानीय नियमों का पालन करना होता है। स्थानीय गाइड और पोर्टर रखने से सुरक्षा और रसद व्यवस्था में मदद मिलती है। पर्वतारोहियों को ऊंचाई के अनुकूल होने के लिए कम ऊंचाई पर समय भी बिताना होता है। 

कठिन है पहाड़ की अंतिम चढ़ाई

बेस कैंप तक की चढ़ाई लगभग 15 किलोमीटर है, और अंतिम चढ़ाई कठिन और तकनीकी होती है। पर्वतारोही शिखर पर चढ़ने से पहले लगभग 4,800 मीटर की ऊंचाई पर बेस कैंप स्थापित करते हैं। वो क्रैम्पन, बर्फ की कुल्हाड़ी, रस्सियां और हेलमेट जैसे उपकरणों का उपयोग करते हैं। शिखर से आसपास के पहाड़ों और घाटियों का विस्तृत दृश्य दिखाई देता है।

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