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भारत-चीन के रिश्ते होंगे और मजबूत, बीजिंग ने की दुर्लभ धातुओं के निर्यात को मंजूरी देने की घोषणा

 Published : Dec 19, 2025 10:25 pm IST,  Updated : Dec 19, 2025 10:25 pm IST

चीन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए दुर्लभ धातुओं के निर्यात को मंजूरी देने का ऐलान किया है। ऐसे में भारत-चीन के रिश्तों में और सुधार आने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (दाएं)- India TV Hindi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (दाएं) Image Source : PTI

बीजिंग: भारत और चीन के रिश्ते आने वाले समय में और अधिक मजबूत हो सकते हैं। चीन ने शुक्रवार को नागरिक उपयोग के लिए दुर्लभ धातुओं के निर्यात को मंजूरी देने का ऐलान किया है। बीजिंग का यह फैसला भारतर-चीन के रिश्तों में सुधार को गति  देगा। चीन की यह घोषणा भारत सहित कई देशों द्वारा बीजिंग से निर्यात प्रतिबंध हटाने और आधुनिक उत्पादों के निर्माण में आवश्यक इन बहुमूल्य धातुओं की आपूर्ति फिर से शुरू करने की मांग के बीच आई है।

चीनी विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग में दुर्लभ धातुओं से संबंधित वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ये नियंत्रण कानूनों और नियमों के अनुसार हैं, जो कि किसी विशिष्ट देश को लक्षित नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया, “जब तक निर्यात नागरिक उपयोग के लिए है और संबंधित नियमों का पालन किया जाता है, चीनी सरकार समय पर आवेदनों को मंजूरी दे देगी। प्रवक्ता ने रक्षा उत्पादों के निर्माण में उपयोग होने वाली धातुओं के निर्यात पर सख्त रुख बरकरार रखते हुए जोर दिया कि परमिट केवल नागरिक उपयोग के लिए जारी किए जाएंगे, क्योंकि इन धातुओं का इस्तेमाल सैन्य उपकरणों में भी हो सकता है।

चीन है दुर्लभ धातुओं का भंडार गृह

गुओ जियाकुन ने कहा, “चीन वैश्विक औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता बनाए रखने के लिए संबंधित देशों के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने को तैयार है। गौरतलब है कि दुनिया के दुर्लभ धातु भंडार पर चीन का लगभग एकाधिकार रहा है। गुरुवार को ही चीन ने इस साल की शुरुआत में लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों को हटाने की पुष्टि की थी, जिससे वैश्विक बाजार में राहत की उम्मीद जगी है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, नवीकरणीय ऊर्जा और हाई-टेक उद्योगों में दुर्लभ धातुओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत जैसे देशों के लिए यह आपूर्ति श्रृंखला की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

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