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Explainer: कट्टरपंथ की राह पर बांग्लादेश? फिर क्यों भड़की हिंसा, जानें उन संगठनों के बारे में जो इसे बनाना चाहते हैं पाकिस्तान

बांग्लादेश आज उस मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है जहां एक तरफ धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक विरासत है तो दूसरी ओर कट्टरपंथी ताकतें जो उसे पाकिस्तान जैसा बनाना चाहती हैं। चलिए इसी पर विस्तार से नजर डालते हैं।

Edited By: Amit Mishra @AmitMishra64927
Published : Dec 19, 2025 01:18 pm IST, Updated : Dec 19, 2025 01:44 pm IST
Extremism In Bangladesh- India TV Hindi
Image Source : AP/INDIA TV Extremism In Bangladesh

Extremism In Bangladesh: बांग्लादेश का जन्म 1971 में एक धर्मनिरपेक्ष, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर हुआ था। शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में बने इस देश की बुनियाद में लोकतंत्र, सेक्युलरिज्म और समावेशिता के मूल्य निहित थे। लेकिन, बीते कुछ वर्षों में बांग्लादेश में बार-बार हिंसा, कट्टरपंथ और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बांग्लादेश कट्टरपंथ की राह पर बढ़ रहा है? और यदि हां, तो इसके पीछे कौन से संगठन और ताकतें हैं जो इसे पाकिस्तान जैसा इस्लामी कट्टर देश बनाना चाहती हैं? चलिए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

कट्टरपंथ क्या है?

कट्टरपंथ से मतलब किसी धर्म या विचारधारा की कठोर और असहिष्णु व्याख्या से है, जिसमें हिंसा को भी जायज मान लिया जाता है। बांग्लादेश के लिहाज से यह प्रवृत्ति उस मानसिकता से जुड़ी हुई है जो देश की धर्मनिरपेक्ष पहचान को कमजोर करके उसे इस्लामी कट्टरवाद की दिशा में ले जाना चाहती है। यह ठीक वही रास्ता है जिस पर पाकिस्तान चला है। नतीजा यह हुआ है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र तमाशा बना है और यहां धार्मिक पहचान निरंतर हावी होती गई है।

बांग्लादेश में बढ़ी है हिंसा

हाल के दिनों में यह देखने को मिला है कि बांग्लादेश में हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। कभी शेख हसीना के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन होते हैं तो कभी किसी अन्य मुद्दे पर लोग सड़कों पर उतर आते हैं। बांग्लादेश एक बार फिर हिंसा की चपेट में है। चलिए पहले आपको ताजा घटना के बारे में बताते हैं फिर यह भी जानते हैं कि वो कौन सी वजहें हैं जिसकी वजह से यहां अक्सर हिंसा देखने को मिलती है। 

Bangladesh Violence

Image Source : AP
Bangladesh Violence

शरीफ उस्मान हादी की मौत

बांग्लादेश के कई शहरों में एक बार फिर हिंसा इस वजह से भड़की है क्योंकि शरीफ उस्मान हादी नाम के एक युवा नेता की मौत हो गई है। हादी को अज्ञात हमलावरों ने उस वक्त गोली मारी थी जब वो ढाका में चुनाव प्रचार कर रहे थे। गोली लगने के बाद हादी को इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया था और यहीं अस्पताल में उनकी मौत हुई है। हादी ने शेख हसीना के खिलाफ हुए हिंसक विद्रोह में बड़ी भूमिका निभाई थी। हिंसक विरोध प्रदर्शनों के चलते हसीना को पीएम पद के साथ-साथ देश भी छोड़ना पड़ा था।

बांग्लादेश में हिंसा क्यों भड़कती है?

बांग्लादेश में हिंसा के कई वजहें हैं जिनमें राजनीतिक ध्रुवीकरण को सबसे बड़ा कारण माना जा सकता है। अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के बीच हमेशा तीखा संघर्ष देखने को मिलता रहा है। चुनावों के समय हिंसा आम हो जाती है। इसके अलावा यहां कट्टरपंथी संगठनों की सक्रियता भी हिंसा का बड़ा कारण है। ये संगठन धार्मिक भावनाओं को भड़काकर समाज में तनाव पैदा करते हैं।

संगठन जो बांग्लादेश को बनाना चाहते हैं पाकिस्तान

चलिए अब आपको उन संगठनों के बारे में बताते हैं जो बांग्लादेश को पाकिस्तान बनाना चाहते हैं। इन संगठनों में सबसे पहला नाम जमात-ए-इस्लामी का आता है। जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश का सबसे पुराना और प्रभावशाली संगठन रहा है। 1971 के मुक्ति संग्राम में इस संगठन पर पाकिस्तानी सेना का साथ देने के आरोप लगे, जिसके कारण आज भी इसे संदेह की नजर से देखा जाता है। जमात इस्लामी राज्य की वकालत करता है जो बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष छवि से पूरी तरह अलग है।

Bangladesh Violence

Image Source : AP
Bangladesh Violence

हिफाजत-ए-इस्लाम

यह बांग्लादेश का एक प्रमुख देवबंदी इस्लामी संगठन है। यह संगठन मदरसों से जुड़ा है और कट्टर इस्लामी कानूनों की वकालत करता है। यह महिला अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर कठोर रुख रखता है। इसके आंदोलन कई बार हिंसक रूप ले चुके हैं।

अंसारुल्लाह बांग्ला टीम

यह एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन है, जिस पर ब्लॉगरों, लेखकों और सेक्युलर विचारकों की हत्या के आरोप लगे हैं। इसका मकसद बांग्लादेश में शरीयत के अनुसार शासन स्थापित करना है। अंसारुल्लाह बांग्ला को आतंकी संगठन अल-कायदा से प्रेरित बताया जाता है। 

जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश

जमात उल मुजाहिदीन पर बांग्लादेश में बम धमाकों और आतंकी गतिविधियों का लंबा इतिहास रहा है। यह संगठन खुलकर इस्लामी खिलाफत की बात करता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को 'गैर-इस्लामी' मानता है। इसने कई बार स्पष्ट रूप से कहा है कि यह बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था का विरोध करता है।

पाकिस्तान से वैचारिक समानता

अभी आपने बांग्लादेश के संगठनों और इनकी विचारधारा के बारे में जाना। साफ पता चलता है कि इन संगठनों की विचारधारा में पाकिस्तान की कट्टरपंथी सोच मिलती है। पाकिस्तान में कट्टरपंथ जिस तरह से हावी है उसकी वजह से वहां के लोकतंत्र की हालत पूरी दुनिया ने देखी है। इतना ही नहीं यहां अल्पसंख्यकों के अधिकार ना को बराबर हैं और उनके साथ भेदभाव, अत्याचार आम है। ऐसे में कट्टरपंथी संगठनों की वजह से बांग्लादेश में भी यही खतरा नजर आता है।

Bangladesh Violence

Image Source : AP
Bangladesh Violence

बांग्लादेश को तय करना होगा उसका भविष्य

कट्टरपंथ का असर भारत-बांग्लादेश के रिश्तों पर भी पड़ता है। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे दोनों देशों के लिए संवेदनशील हैं। एक स्थिर, धर्मनिरपेक्ष बांग्लादेश पूरे दक्षिण एशिया के हित में है। अगर बांग्लादेश को अपनी पहचान बचानी है तो उसे ना केवल कट्टरपंथी संगठनों से सख्ती से निपटना होगा, बल्कि समाज के हर स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना होगा। यही वो रास्ता है जो उसे हिंसा से दूर और स्थिर भविष्य की ओर ले जा सकता है।

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