काठमांडू: भारत के पड़ोसी देश नेपाल में सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। पूर्वी नेपाल के कोशी प्रांत के संखुवासभा जिले में मंगलवार को 4.3 तीव्रता का भूकंप आया। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक इस भूकंप की वजह से किसी भी तरह के नुकसान की तत्काल कोई खबर नहीं मिली है। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र के अनुसार भूकंप काठमांडू से 225 किलोमीटर पूर्व में तिब्बत सीमा के पास किमाथांगका क्षेत्र के आसपास आया।
अधिकारियों ने भूकंप के बारे में जानकारी दी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक मंगलवार सुबह 7:32 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। ये भूकंप पड़ोसी तापलेजंग, भोजपुर और सोलुखुम्बु जिलों में भी महसूस किया गया। हालांकि, भूकंप से किसी भी तरह के नुकसान की तत्काल कोई खबर नहीं है। बता दें कि नेपाल सबसे सक्रिय टेक्टोनिक क्षेत्रों (भूकंपीय क्षेत्र 4 और 5) में से एक में स्थित है, जो इसे भूकंपों के लिए बेहद संवेदनशील बनाता है।
क्यों आते हैं भूकंप?
हाल के दिनों में देश-दुनिया के कई इलाकों में भूकंप की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हमारी धरती के भीतर 7 टेक्टोनिक प्लेट्स हैं। ये प्लेट्स लगातार अपने स्थान पर घूमते रहती हैं। हालांकि, कभी-कभी इनमें टकराव या घर्षण भी होता है। इसी कारण धरती पर भूकंप की घटनाएं देखने को मिलती हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम जनजीवन को उठाना पड़ता है। भूकंप से मकानें गिर जाती हैं, जिसमें दबकर हजारों लोगों की मौत हो जाती है।
भारत में क्या हैं भूकंप के जोन
भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कुल भूभाग के लगभग 59 फीसदी हिस्से को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। वैज्ञानिकों ने भारत में भूकंप क्षेत्र को जोन-2, जोन-3, जोन-4 व जोन-5 यानी 4 भागों में विभाजित किया है। जोन-5 के इलाकों को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है, जबकि जोन-2 कम संवेदनशील माना जाता है। हमारे देश की राजधानी दिल्ली भूकंप के जोन-4 में आती है। यहां 7 से अधिक तीव्रता के भी भूकंप आ सकते हैं जिससे बड़ी तबाही हो सकती है। भारत में हिमालय क्षेत्र और कुछ अन्य फॉल्ट लाइनों (जैसे कच्छ, पूर्वोत्तर भारत) के कारण भूकंप का खतरा अधिक है, क्योंकि भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है।
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता
4 से 4.9 तीव्रता के भूकंप में घर में रखा सामान अपनी जगह से नीचे गिर सकता है। 5 से 5.9 तीव्रता के भूकंप में भारी सामान और फर्नीचर भी हिल सकता है। 6 से 6.9 में इमारत का बेस दरक सकता है। 7 से 7.9 में इमारतें गिर जाती हैं। 8 से 8.9 में सुनामी का खतरा होता है और ज्यादा तबाही मचती है। 9 या ज्यादा में सबसे भीषण तबाही होती है। (इनपुट- पीटीआई)
यह भी पढ़ें-
विमानवाहक पोत USS Nimitz पर 30 मिनट के अंदर हुआ कुछ ऐसा कि हिल गया अमेरिका, जानें पूरा मामला