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रूस से तेल खरीदने के लिए "हंगरी" हुआ ये देश, ट्रंप से साफ कहा-"हम इसे नहीं रोक सकते"

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Sep 26, 2025 04:50 pm IST,  Updated : Sep 26, 2025 04:50 pm IST

रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके ही एक सहयोगी देश ने बड़ा झटका दिया है। हंगरी ने कहा है कि वह आगे भी रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा।

विक्टर ओर्बन, हंगरी के प्रधानमंत्री - India TV Hindi
विक्टर ओर्बन, हंगरी के प्रधानमंत्री Image Source : AP

बुडापेस्ट: रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की ट्रंप की धमकी के बावजूद एक यूरोपीय देश ने अमेरिका की बात मानने से साफ इनकार कर दिया है। इस छोटे से यूरोपीय देश ने ट्रंप को आईना दिखाया है। इस देश का नाम हंगरी है। यह मध्य यूरोप में स्थित राष्ट्र है। 

ट्रंप की धमकी के बावजूद जारी रखेंगे रूस से तेल खरीद

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने शुक्रवार को साफ कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल और गैस की खरीद रोकने की मांग किए जाने के बावजूद उनका देश रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदना जारी रखेगा। विक्टर ओर्बन के इस बयान को ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। बता दें की राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर कुल 50 फीसदी का टैरिफ लगाया है। वहीं चीन पर 30 फीसदी का टैक्स लगाया है। वह अब नाटो देशों से भी ऐसा करने और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं। मगर हंगरी ने ट्रंप की इस मांग को खारिज कर दिया है।

हंगरी ने क्यों नहीं मानी ट्रंप की बात

हंगरी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की उस धमकी और अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने रूस से तेल नहीं खरीदने को कहा था। हंगरी के पीएम ओर्बन ने अपने सहयोगी देश अमेरिका के राष्ट्रपति को बताया कि रूसी ऊर्जा पर रोक लगाना हंगरी की अर्थव्यवस्था के लिए ‘‘विनाशकारी’’ होगा। इसलिए हम इस खरीद को रोक नहीं सकते, बल्कि इसे आगे भी जारी रखेंगे।

अमेरिका के सहयोगी देश ने दिया ट्रंप को झटका

हंगरी अमेरिका का सहयोगी देश है। इसके बावजूद उसने रूस से तेल खरीदना जारी रखने की बात कहकर ट्रंप को बड़ा झटका दिया है। बता दें कि फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यूरोप के ज्यादातर देशों ने रूसी तेल और गैस की खरीद बंद कर दी है, लेकिन हंगरी उन देशों में शामिल है, जो अब भी रूस से तेल और गैस खरीद रहा है। ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में हंगरी समेत नाटो के सभी देशों से अपील की थी कि वे रूसी तेल की खरीद बंद करें। ओर्बन ने सरकारी रेडियो को दिए एक बयान में कहा, "मैंने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा -रूसी ऊर्जा पर रोक लगाना हंगरी की अर्थव्यवस्था के लिए ‘‘विनाशकारी’’ होगा।".

 

कि यदि हंगरी को रूसी तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति नहीं मिली तो एक मिनट के भीतर ही हंगरी की अर्थव्यवस्था प्रभावित होने लगेगी.

 

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इसका मतलब है कि हंगरी की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।" यूरोपीय संघ और ट्रंप प्रशासन के दबाव के बावजूद ओर्बन ने कहा कि ऊर्जा नीति के मामले में हंगरी केवल अपने हित को प्राथमिकता देगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि हंगरी के हित में क्या है और हम उसी के अनुसार कार्य करेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हंगरी और अमेरिका दोनों संप्रभु देश हैं। हमें एक-दूसरे के तर्क स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं है।’

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