21 नवंबर के बाद रूसी तेल का आयात घटकर लगभग 12.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो मासिक आधार पर 5.7 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी दर्शाता है।
भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा पर किसी बाहरी दबाव के आगे झुकेगा नहीं। अमेरिकी दबाव और पश्चिमी देशों की पाबंदियों के बीच इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने रूस से कार्गो यानी तेल के 5 जहाज खरीदे हैं, जो दिसंबर में भारत पहुंचेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर को ल्यूकऑयल के साथ रूस की एक अन्य तेल कंपनी रॉसनेफ्ट पर भी नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। ये दोनों कंपनियां रूस के कुल तेल निर्यात का करीब आधा हिस्सा संभालती हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर बड़ा टैरिफ लगा दिया, जिसे लेकर चीन ने अमेरिका को धमकी दी है, जिसके बाद ट्रंप ने कहा है कि जल्द जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। उन्होंने रूस को लेकर बड़ी बात कही है। जानें पीएम मोदी के लिए ट्रंप ने क्या कहा?
रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके ही एक सहयोगी देश ने बड़ा झटका दिया है। हंगरी ने कहा है कि वह आगे भी रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की को चेतावनी दी है कि अब आपको एक समझौता करना ही होगा, वहीं ट्रंप ने यूरोप को भी रूस से तेल खरीदने से मना किया है। जानें क्या कहा?
पीएम मोदी के चीन दौरे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया है। इसके बाद ट्रंप ने भारत पर अभी और अधिक टैरिफ लगाने की धमकी दी है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका ने मॉस्को पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने कहा कि इससे रूस युद्ध के लिए ज्यादा धन नहीं जुटा सका। अमेरिका ने कहा कि उसने कभी भारत पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव नहीं डाला था, बल्कि उसके प्रतिबंध से भारत को सस्ता तेल मिला।
रूसी कच्चे तेल पर छूट में गिरावट और पेमेंट संबंधी दिक्कतें पेश आ रही हैं। इसी बीच खबर है कि भारत के सरकार रिफाइनर कच्चे तेल की खरीद के लिए मध्य पूर्व के अपने पुराने तेल निर्यातक देशों की ओर मुड़ रहे हैं।
India on Russian Oil: एस. जयशंकर ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘आज स्थिति ऐसी है कि हर देश अपने नागरिकों के लिए सर्वश्रेष्ठ सौदा करने की कोशिश करेगा, ताकि वह इन उच्च कीमतों का असर झेल सके और हम यही कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत ‘रक्षात्मक तरीके’ से ऐसा नहीं कर रहा है।
देश में पेट्रोल और डीजल के दाम भले ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हों लेकिन जिस रफ्तार से अमेरिका में ऑयल रिग्स की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है उसे देखते हुए लग रहा है कि सस्ते पेट्रोल और डीजल वाले अच्छे दिन फिर से वापस लौट सकते हैं। अमेरिका में ऑयल रिग्स के बारे में आंकड़े जारी करने वाली संस्था बेकर हग्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ऑयल रिग्स की संख्या 3 साल के ऊपरी स्तर तक पहुंच गई है
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