सकट चौथ के दिन तिलकुट बनाया और खाया जाता है। इस दिन तिल और गुड़ से बनी चीजों को विशेष महत्व होता है। सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और ताकत देने के लिए गुड़ और तिल दोनों बहुत फायदेमंद हैं। हड्डियों के दर्द को दूर करने के लिए तिल और गुड़ मिलाकर खाने चाहिए। आप बहुत कम घी से तिलकुट बनाकर खा सकते हैं। घर के बने तिलकुट बाजार की गजक को भी फेल कर देंगे। जान लें दादी नानी तिलकुट कैसे बनाती हैं। फटाफट नोट कर लें तिलकुट की रेसिपी।
तिलकुट की रेसिपी
पहला स्टेप- तिलकुट बनाने के लिए आपको करीब 150 ग्राम सफेद तिल लेने हैं। तिल के बराबर यानि 150 ग्राम गुड़ लें और 1 टीस्पून देसी घी ले लें।
दूसरा स्टेप- एक कड़ाही में तिल को मीडियम फ्लेम पर हल्का ब्राउन होने तक भून लें। बिना तेल या घी के तिल आसानी से भुन जाते हैं। बस बीच-बीच में चलाते रहें जिससे तिल नीचे से जलें नहीं। जब तिल हल्के ठंडे हो जाएं को मिक्सी में दरदरा पीस लें।
तीसरा स्टेप- अब कड़ाही में गुड़ को बारीक टुकड़ों में तोड़कर डालें और इसमें 1 चम्मच पानी मिलाकर चाशनी तैयार कर लें। गुड़ को चलाते रहें जिससे जल्दी पिघल जाए। जब गुड़ कड़ाही को छोड़ने लगे और उसमें बबल बन जाएं तो चाशनी को चेक कर लें।
चौथा स्टेप- एक चम्मच में पानी लें और उसमें गुड़ की चाशनी की 1-2 बूंद डालकर 10 सेकेंड के लिए छोड़ दें। अब चेक करें अगर चाशनी तार जैसी खिंच रही है तो इसे थोड़ी देर और पकाएं। धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए गुड़ को और पका लें। अब एक बार फिर से चम्मच में कुछ बूंदे डालकर चेक करें। चाशनी को इतना पकाना है कि चिपक खत्म हो जाए और गुड़ आसानी से टूट जाए।
पांचवां स्टेप- अब गैस की फ्लेम एकदम कम कर दें और पिसे हुए तिल को थोड़ा-थोड़ा करके चाशनी में मिलाते जाएं। गैस बंद कर दें और अब तिलकुट को सेट कर लें। इसके लिए एक चपटी कटोरी या कोई ढक्कन लें और उसमें नीचे थोड़ा घी लगाएं। तैयार मिश्रण को कटोरी में डालें और बेलन की नोक वाली साइड से दबाएं। अब तिलकुट की शेप बनकर तैयार हो जाएगी।
आप इस तिलकुट को सकट चौथ के व्रत में या ऐसे ही रोजाना जब मीठा खाने का जी करे खा सकते हैं। बाजार की गजक से कहीं ज्यादा हेल्दी स्वादिष्ट होता है तिलकुट। आप इसे दूध के साथ भी खा सकते हैं।