जब यूक्रेन के लोगों ने अनाथ बच्चों को रूस से बचाने के लिए बनाई ये योजना

डॉ ओल्गा पिलयारस्का ने बताया, हमने जानबूझकर गलत जानकारी लिखी कि बच्चे बीमार हैं और उन्हें यहां से भेजा नहीं जा सकता। हम डरे हुए थे कि रूस के लोगों को पता चल जाएगा, लेकिन हमने तय कर लिया था कि किसी भी कीमत पर बच्चों को बचाएंगे।

Malaika Imam Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published on: December 05, 2022 16:57 IST
यूक्रेन-रूस के बीच जंग जारी- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO यूक्रेन-रूस के बीच जंग जारी

Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जंग इस साल फरवरी से लगातार जारी है। इसमें रूस ने यूक्रेन में अभी तक भारी तबाही मचाई है। कई शहर तबाह कर दिए हैं। घर के घर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। वहीं, इस जंग को लेकर पश्चिमी देश लगातार रूस की आलोचना कर रहे हैं। इस बीच, यूक्रेन के अनाथ बच्चों को लेकर एक जानकारी सामने आई है।

दरअसल, फरवरी में यूक्रेन पर रूस के हमले की शुरुआत के कुछ ही घंटे बाद देश के दक्षिणी हिस्से में एक बाल अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों ने गोपनीय तरीके से बच्चों को बचाने की योजना बनाना शुरू कर दिया था। उस वक्त रूसी लोगों पर अनाथ बच्चों को बंधक बनाकर उन्हें रूस भेजने का शक था और इसलिए खेरसॉन शहर में बच्चों के एक अस्पताल के कर्मियों ने अनाथ बच्चों के चिकित्सा रिकॉर्ड में हेरफेर करना शुरू कर दिया, ताकि लगे कि वे बहुत बीमार हैं और उन्हें यहां से ले जाना सही नहीं है। 

'गलत जानकारी लिखी कि बच्चे बीमार हैं'

डॉ ओल्गा पिलयारस्का ने कहा, "हमने जानबूझकर गलत जानकारी लिखी कि बच्चे बीमार हैं और उन्हें यहां से भेजा नहीं जा सकता। हम डरे हुए थे कि रूस के लोगों को पता चल जाएगा, लेकिन हमने तय कर लिया था कि किसी भी कीमत पर बच्चों को बचाएंगे।" इस पूरे युद्ध में रूसी लोगों पर यूक्रेन के बच्चों को रूस ले जाने के आरोप लगते रहे हैं। 

रूस के आठ महीने तक खेरसॉन में कब्जे के दौरान इस क्षेत्र में स्कूलों और अनाथालयों से कम से कम 1,000 बच्चों को बंधक बनाया गया। स्थानीय अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इन बच्चों का अभी तक अता-पता नहीं है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लोगों ने बच्चों को बचाने के लिए उन्हें छिपाकर अपनी जान जोखिम में नहीं डाली होती तो और भी बच्चे लापता होते। 

'कुछ बच्चों को दूर के रिश्तेदारों के पास भेजा'

खेरसॉन के बाहरी इलाके में एक गांव में सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पुनर्वास केंद्र के निदेशक वोलोदिमीर सहाईदक ने भी 52 अनाथ और कमजोर बच्चों को छिपाने के लिए फर्जी कागज तैयार किए। उन्होंने कहा कि कुछ बच्चों को उनके सात कर्मी ले गए, कुछ को उनके दूर के रिश्तेदारों के यहां भेज दिया गया और कुछ बड़े बच्चे केंद्र में ही रहे। 

रूस के अधिकारी कहते रहे हैं कि वे बच्चों को हमलों से बचाने के लिए उन्हें रूस ले जाते रहे हैं। रूस के विदेश मंत्रालय ने इन दावों को खारिज कर दिया कि देश बच्चों को बंधक बना रहा है और रूस भेज रहा है। रूस की बाल अधिकार कार्यकर्ता मारिया ल्वोवा बेलोवा ने दावा किया कि कुछ बच्चों को यूक्रेन लौटने की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। हालांकि, उनके बयान को स्वतंत्र तरीके से सत्यापित नहीं किया जा सका। 

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