Indian-Born American Story: सैन फ्रांसिस्को स्थित एक स्टार्टअप के संस्थापक ने दावा किया है कि उनकी मुलाकात भारत में जन्मे एक अमेरिकी नागरिक से हुई, जिसने नौकरी से निकाले जाने के बाद उबर चलाना शुरू कर दिया है। रोनाल्ड नेटावत नाम के शख्स ने बताया कि उन्होंने उबर से यात्रा बुक की और एक शानदार टेस्ला कार को रुकते देखकर हैरान रह गए। उबर ड्राइवर से बातचीत करने पर पता चला कि वह 40 के दशक के अंत में एक भारतीय व्यक्ति था, जो लगभग 2 दशक पहले अमेरिका आया था। शख्स ने तकनीक के क्षेत्र में प्रभावशाली करियर बनाया लेकिन हाल ही में Cognizant ने उसे नौकरी से निकाल दिया जिसके बाद अब वो उबर चलाता है।
एप्पल से उबर तक का सफर
एंटिम लैब्स के संस्थापक रिसर्च इंजीनियर नेटावत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उनका उबर ड्राइवर एक भारतीय व्यक्ति था, जिसे प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में 25 वर्षों का अनुभव था। 2007 में, यह अनाम ड्राइवर H-1B वीजा पर अमेरिका आया था। उसने वेरिजोन और एप्पल जैसी कुछ प्रमुख कंपनियों के लिए काम किया, और एक आईटी फर्म का CTO भी बना। अमेरिका में 15 साल बिताने के बाद, इस भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ को अमेरिकी नागरिकता मिल गई। हालांकि, हाल ही में Cognizant ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया, जिससे उन्हें अपने करियर की दिशा पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
नेटावत ने दिए सबूत
रोनाल्ड नेटावत ने सबूत के तौर पर ड्राइवर की लिंक्डइन प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए। नेटावत ने यह भी कहा कि किसी अन्य प्रोजेक्ट मैनेजर की नौकरी के लिए साइन अप करने के बजाय, इस भारतीय-अमेरिकी व्यक्ति ने उबर के लिए ड्राइविंग शुरू करने का फैसला किया।
H-1B वीजा को लेकर छिड़ी बहस
रोनाल्ड नेटावत की सोशल मीडिया पोस्ट ने H-1B वीजा पर बहस छेड़ दी है। इस बीच अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने एक बार फिर अपनी H-1B वीजा पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। इस बार टारगेट है विदेशी एक्सपर्ट्स को बुलाना, अमेरिकी वर्कर्स को ट्रेन करना और फिर वापस भेज देना। यह नया मॉडल अमेरिकी उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन इसका सीधा असर भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है, जो अब तक अमेरिका के टेक सेक्टर की रीढ़ माने जाते रहे हैं।
अमेरिकी कर रहे आलोचना
इस बीच यहां यह भी बता दें कि, हाल ही में एक अमेरिकी व्यक्ति ने H-1B वीजा नीति की आलोचना की थी। H-1B वीजा नीति की आलोचना करने वाले शख्स का नाम नाथन प्लैटर था। नाथन प्लैटर ने अपनी एक दोस्त का उदाहरण दिया था, जिसे निर्धारित 2 महीनों के भीतर नई नौकरी ना मिलने के कारण अमेरिका छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
यह भी पढ़ें:
शेख हसीना को फांसी की सजा, ICT ने कहा- निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मारा, अपराध मानवता के खिलाफ