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Bihar Politics: नीतीश की नई सरकार में 2 महीने में 2 मंत्रियों ने दिया इस्तीफा, दोनों सवर्ण, उठने लगे हैं सवाल

Bihar Politics: कार्तिकेय कुमार जहां भूमिहार समाज से आते हैं, वहीं सुधाकर सिंह राजपूत जाति से आते हैं। बीजेपी के नेता और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि दो माह में टीम नीतीश का दूसरा विकेट गिरा है, इससे नीतीश कुमार की फजीहत बढ़नी तय है।

Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published : Oct 03, 2022 04:26 pm IST, Updated : Oct 03, 2022 04:26 pm IST
Bihar CM Nitish Kumar- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO Bihar CM Nitish Kumar

Highlights

  • महागठबंधन की सरकार बनने के दो महीने गुजरे हैं
  • दो महीने में सवर्ण जाति के दो मंत्रियों ने दिया इस्तीफा
  • सुधाकर सिंह को कृषि मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा

Bihar Politics: बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनने के दो महीने ही गुजरे हैं, लेकिन दो मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा। इस्तीफा देने वाले दोनों सवर्ण वर्ग से आते हैं। ऐसी स्थिति में अब सरकार को लेकर सवाल उठाए जाने लगे हैं। महागठबंधन की सरकार बनने के बाद आरजेडी (RJD) कोटे के कार्तिकेय कुमार को जहां एक हत्या के मामले में आरोपी होने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था, वहीं रविवार को आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के पुत्र सुधाकर सिंह को कृषि मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा।

दो माह में टीम नीतीश का दूसरा विकेट गिरा- मोदी

कार्तिकेय कुमार जहां भूमिहार समाज से आते हैं, वहीं सुधाकर सिंह राजपूत जाति से आते हैं। बीजेपी के नेता और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि दो माह में टीम नीतीश का दूसरा विकेट गिरा है, इससे नीतीश कुमार की फजीहत बढ़नी तय है। इधर, कहा जा रहा है कि सुधाकर सिंह का इस्तीफा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दबाव में लिया गया है। 

 मंत्री बनने के बाद से ही सुधाकर भ्रष्टाचार को लेकर मुखर थे 

सुधाकर सिंह मंत्री बनने के बाद से ही विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर मुखर थे और उन्होंने अधिकारियों को चोरों की जमात तक बोल दिया था। इतना ही नहीं सिंह एक कैबिनेट की बैठक से भी निकल गए थे, जिससे सरकार की किरकिरी हुई थी। इधर, आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने भी दो दिन पहले तेजस्वी यादव को 2023 तक मुख्यमंत्री बनने की भविष्यवाणी कर दी थी। इससे भी जदयू की नाराजगी बढ़ी थी।

तेजस्वी के ए टू जेड समीकरण पर भी उठने लगे हैं सवाल

जेडीयू की नाराजगी दूर करने के लिए आरजेडी ने प्रवक्ताओं को कई मामले में चुप रहने तक के निर्देश दिए गए हैं। वैसे, आरजेडी कोटे के दो सवर्ण मंत्रियों के इस्तीफा दिए जाने के बाद तेजस्वी के ए टू जेड समीकरण पर भी सवाल उठाए जाने लगे हैं। तेजस्वी यादव अपनी पार्टी आरजेडी को मुस्लिम-यादव तक सीमित रखने के बजाय सभी वर्गों, जातियों, समाज की पार्टी बताते हुए ए-टू-जेड की पार्टी कहते रहे हैं, ऐसे में इस समीकरण पर प्रश्न खड़ा हुआ है।

 महत्वांकाक्षी नीतीश कुमार की फजीहत बढ़ने वाली है- मोदी

मोदी कहते हैं कि तेजस्वी प्रसाद यादव को अगले साल 2023 में मुख्यमंत्री बनाने की डील सार्वजनिक करने की कीमत जगदानंद को बेटे के मंत्री पद का बलिदान कर चुकानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि दो महीने में दो दागी मंत्रियों की विदाई के साथ राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और महत्वांकाक्षी नीतीश कुमार की फजीहत बढ़ने वाली है।

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