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रविशंकर प्रसाद ने की खेल मंत्री से सिफारिश, कहा- 1200 किमी साइकल चलाने वाली ज्योति की प्रतिभा को निखारा जाए

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : May 24, 2020 07:11 am IST,  Updated : May 24, 2020 07:19 am IST

बिहार की बिटिया जिसने एक हज़ार किलोमीटर से अधिक की यात्रा साइकिल पर अपने पिता को बैठा कर की, उसके जज़्बे को सलाम किया केंद्रिय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने और खेल मंत्री किरण रिजिजू से बात कर उसकी इस प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया।

Ravi Shankar Prasad urges Kiren Rijiju to help Bihar girl Jyoti Kumari Paswan who cycled 1200 km car- India TV Hindi
Ravi Shankar Prasad urges Kiren Rijiju to help Bihar girl Jyoti Kumari Paswan who cycled 1200 km carrying injured dad Image Source : @RSPRASAD

पटना: बिहार की बिटिया जिसने लगभग 1200 किलोमीटर से अधिक की यात्रा साइकिल पर अपने पिता को बैठा कर की, उसके जज़्बे को सलाम किया केंद्रिय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने और खेल मंत्री किरन रिजजू से बात कर उसकी इस प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया। रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट कर लिखा कि इस कठिन समय के दौरान हम सभी नागरिकों की मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में बिहार की एक युवा लड़की का साहस देखने को मिला जो अपने पिता को गुरुग्राम से दरभंगा लगभग 1200 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर पहुंची। इस लड़की की प्रतिभा की पहचान करने के लिए मैने खेल मंत्री किरन रिजिजू से बात की है। 

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि उन्होनें खेल मंत्री किरेन रिजिजू से अनुरोध किया कि वह बिहार की इस साहसी लड़की ज्योति कुमारी पासवान को प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति के माध्यम से पूरा सहयोग दें ताकि वह अपने साइकिलिंग टेलेंट को और विकसित कर सके। उन्होनें कहा कि मैं उनके साहस और दृढ़ संकल्प को सलाम करता हूं।

लॉकडाउन के दौरान प्रवासी कामगारों के हौसले की एक कहानी बिहार से तक सामने आई जब हरियाणा के गुरुग्राम से अपने पिता को साइकिल पर बैठा 15 साल की एक लड़की बिहार के दरभंगा पहुंच गई। दरभंगा जिला के सिंहवाड़ा प्रखण्ड के सिरहुल्ली गांव निवासी मोहन पासवान गुरुग्राम में रहकर टेम्पो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण किया करते थे पर इसी बीच वे दुर्घटना के शिकार हो गए। 

दुर्घटना के बाद अपने पिता की देखभाल के लिये 15 वर्षीय ज्योति कुमारी वहां चली गई थी पर इसी बीच कोरोना वायरस की वजह से देशव्यापी बंदी हो गयी। आर्थिक तंगी के मद्देनजर ज्योति के साईकिल से अपने पिता को सुरक्षित घर तक पहुंचाने की ठानी। बेटी की जिद पर उसके पिता ने कुछ रुपये कर्ज लेकर एक पुरानी साइकिल साईकिल खरीदी। 

ज्योति अपने पिता को उक्त साईकिल के कैरियर पर एक बैग लिए बिठाए आठ दिनों की लंबी और कष्टदायी यात्रा के बाद अपने गांव सिरहुल्ली पहुंची है। गांव से कुछ दूरी पर अपने पिता के साथ एक पृथक-वास केंद्र में रह रही ज्योति अब अपने पिता के हरियाणा वापस नहीं जाने को कृतसंकल्पित है । वहीं ज्योंति के पिता ने कहा कि वह वास्तव में मेरी “श्रवण कुमार” है।

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