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"सुप्रीम कोर्ट पर ऐसी टिप्पणी...", निशिकांत दुबे के बयान पर तेजस्वी यादव ने जताया एतराज, कही ये बातें

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Apr 20, 2025 03:45 pm IST,  Updated : Apr 20, 2025 04:07 pm IST

सुप्रीम कोर्ट पर की गई टिप्पणी को लेकर तेजस्वी यादव ने निशिकांत दुबे के बयान पर एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह की टिप्पणियां करता है, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए।

तेजस्वी यादव और निशिकांत दुबे- India TV Hindi
तेजस्वी यादव और निशिकांत दुबे Image Source : PTI

सुप्रीम कोर्ट पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दिए गए बयान पर बिहार में इंडिया गठबंधन के समन्वय समिति के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया आई है। तेजस्वी यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पर ऐसी टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति इस तरह की टिप्पणियां करता है, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। 

दरअसल, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर एक बयान देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर संसद के कानून बनाने की शक्ति को कमजोर करने और अपनी संवैधानिक सीमा से बाहर जाने का आरोप लगाया। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए जिम्मेदार है और अपनी सीमा से बाहर जा रहा है। उनका यह बयान कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं के निशाने पर आ गया है।

"संसद इस देश का कानून बनाती है"

बीजेपी सांसद ने कहा, "अगर हर बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना है, तो संसद और विधानसभा का कोई मतलब नहीं है, इसे बंद कर देना चाहिए। आप अपॉइंटिंग अथॉरिटी को निर्देश कैसे दे सकते हैं? राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश को नियुक्त करते हैं। संसद इस देश का कानून बनाती है। आपने नया कानून कैसे बनाया? किस कानून में लिखा है कि राष्ट्रपति को 3 महीने के भीतर फैसला करना है? इसका मतलब है कि आप इस देश को अराजकता की ओर ले जाना चाहते हैं।"

उनके बयान को लेकर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस सांसद मणिकम टौगोर ने इसे "दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया और उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश दुबे के बयान का संज्ञान लेंगे। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि यदि कोई सांसद सुप्रीम कोर्ट या किसी भी न्यायालय पर सवाल उठाता है, तो यह "बहुत दुख की बात है", क्योंकि भारत के कानूनी ढांचे में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट का होता है, न कि सरकार का।

सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने दो अहम निर्देश जारी किए थे, जिनमें 8 अप्रैल 2025 को तमिलनाडु बनाम राज्यपाल मामले में राष्ट्रपति को राज्यपालों द्वारा भेजे गए विधेयकों पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया था और 15 अप्रैल 2025 को वक्फ (संशोधन) अधिनियम पर अंतरिम आदेश जारी किया था। इन फैसलों ने संसद की शक्ति और सुप्रीम कोर्ट की सीमा के बीच विवाद को और बढ़ा दिया।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस पर तंज कसते हुए कहा, "जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, तब एक हाई कोर्ट जज के फैसले के आधार पर उनसे इस्तीफा मांगा गया था। उस समय बीजेपी के लोग हाई कोर्ट जज का समर्थन करते थे। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ क्यों हैं?"

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