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दिल्ली हिंसा: हाई कोर्ट के जज के घर आधी रात हुई सुनवाई, घायलों को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Feb 26, 2020 09:03 am IST,  Updated : Feb 26, 2020 09:03 am IST

हिंसा से सुलग रही दिल्ली के हालात को लेकर मंगलवार आ​धी रात दिल्ली हाई में सुनवाई हुई। रात करीब 12 बजे दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस मुरलीधर के घर सुनवाई हुई।

Delhi Violence - India TV Hindi
Delhi Violence 

हिंसा से सुलग रही दिल्ली के हालात को लेकर मंगलवार आ​धी रात दिल्ली हाई में सुनवाई हुई। रात करीब 12 बजे दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस मुरलीधर के घर सुनवाई हुई। इसमें उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा में घायलों को बड़े सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने और एंबुलेंस को सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए गए। जस्टिस मुरलीधर ने आधी रात को डीसीपी से फोन पर बातचीत की और घायलों को तुरंत पास के बडे़ सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश दिया। 

दरअसल, दिल्ली के मुस्ताफाबाद के अस्पताल में कई घायल भर्ती हैं, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की गई। इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस मुरलीधर के घर आधी रात को सुनवाई हुई। जज मुरलीधर ने रात में ही अस्पताल के डॉक्टरों और डीसीपी से बातचीत की और स्टेटस रिपोर्ट मांगी। दिल्ली हिंसा मामले में राहुल रॉय ने याचिका दाखिल की थी। इस याचिका की पैरवी वरिष्ठ वकील सुरूर मंडेर और चिरायू जैन कर रहे थे।

आधी रात सुनवाई के दौरान जस्टिस एस. मुरलीधरन ने अल हिंद हॉस्पिटल के डॉक्टर अनवर से बात की और हालात के बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान डॉ. अनवर ने बताया कि अल हिंद हॉस्पिटल में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 घायल हैं। सुनवाई के दौरान ही डीसीपी क्राइम राजेश देव ने अनवर को डीसीपी ईस्ट दीपक गुप्ता का नंबर दिया। साथ ही उन्हें अल हिंद हॉस्पिटल पहुंचकर मदद करने का निर्देश दिया।

आज है दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई

नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के मौजपुर, जाफराबाद इलाकों में हुई हिंसा के संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें एसआईटी गठन की मांग की गई है। इस याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रूख किया और संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली में जारी हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार किये जाने का अनुरोध किया। 

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