Guru Dutt’s 97th birth anniversary: जब अपने एक सीन में जान डालने के लिए गुरु दत्त ने लिए थे 104 रीटेक

Guru Dutt’s 97th birth anniversary: गुरु दत्त (Guru Dutt) को भारतीय सिनेमा का सबसे जीनियस फिल्ममेकर माना जाता है। आज उनके जन्मदिन पर जानिए उनके काम करने के निराले अंदाज के बारे में...

Ritu Tripathi Written By: Ritu Tripathi
Published on: July 09, 2022 8:53 IST
Guru Dutt’s 97th birth anniversary- India TV Hindi News
Image Source : INSTAGRAM Guru Dutt’s 97th birth anniversary

Highlights

  • आज गुरुदत्त का 97वां जन्मदिन है
  • क्या आप जानते हैं गुरुदत्त का असली नाम

Guru Dutt’s 97th birth anniversary: गुरु दत्त (Guru Dutt) को भारतीय सिनेमा का सबसे जीनियस फिल्ममेकर माना जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि टाइम पत्रिका ने गुरुदत्त की फिल्मों 'प्यासा' और 'कागज के फूल' को दुनिया की सौ बेहतरीन फिल्मों में जगह दी थी। बॉलीवुड में गुरुदत्त साल 1944 से 1964 तक सक्रिय रहे। इस दौरान उन्होंने कई बेहतरीन फिल्में दीं। कुछ फिल्मों में खुद अभिनय भी किया, जबकि कुछ का केवल निर्देशन किया। 

क्या आप जानते हैं गुरुदत्त का असली नाम?  

गुरु दत्त (Guru Dutt) के शुरुआती जीवन की बात करें तो उनका जन्म 9 जुलाई, 1925 को हुआ था। उनका असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। गुरुदत्त के पिता का नाम शिवशंकर राव पादुकोण था। मां वसंती पादुकोण की नजर में गुरुदत्त बचपन से ही बहुत नटखट और जिद्दी थे। सवाल पूछते रहना उसका स्वभाव था। एक इंटरव्यू में खुद गुरुदत्त ने बताया था कि कभी-कभी उनके सवालों का जवाब देते-देते मां परेशान हो जाती थीं।

इस फिल्म से बने डायरेक्टर 

गुरु दत्त (Guru Dutt) ने बॉलीवुड में बतौर डायरेक्टर फिल्म 'बाजी' से 1951 में डेब्यू किया था। इस फिल्म में देव आनंद और गीता दत्त मुख्य भूमिका में थे। गुरु दत्त की पहली ही फिल्म जबरदस्त हिट हुई। इसके बाद गुरु दत्त ने 'सीआईडी' में वहीदा रहमान को पहली बार कास्ट किया। इसके बाद तो गुरु दत्त ने अपनी क्लासिकल सिनेमा की झड़ी लगा दी। इन फिल्मों में 'प्यासा', 'साहिब बीवी और गुलाम', 'चौदवीं का चांद', 'कागज के फूल' और 'आर-पार' जैसी फिल्में शामिल हैं। 

जब परफेक्शन के लिए 104 रीटेक दिए

आपको जानकर हैरानी होगी कि गुरु दत्त ने अपने एक सीन को फाइनल करने के लिए 104 रिटेक लिए थे। 'प्यासा' फिल्म के सिनेमैटोग्रफर वीके मूर्ती ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि जूनियर आर्टिस्ट के साथ कुछ सीन्स शूट हो रहे थे, लेकिन वो सही नहीं लग रहे थे। इससे गुरु दत्त बहुत चिढ़े हुए थे। इसके बाद उनका खुद का एक सीन आया। शाम के पांच बजे इस सीन का शूट शुरू हुआ। मूर्ति ने तकरीबन साढ़े पांच घंटे बाद गुरु दत्त को याद दिलाया कि अब रात के साढ़े 10 बज चुके हैं। ये सीन सुबह शूट करेंगे। गुरु दत्त नहीं माने। शूटिंग एक घंटे और चली। लेकिन गुरु दत्त मानने को तैयार नहीं थे। मूर्ति के बहुत मनाने के बाद जाकर जब वो माने, तब तक 104 रीटेक्स हो चुके थे। इसके बाद अगले दिन फिर से इसी सीन से शूट शुरू हुआ और गुरु दत्त ने पहले ही टेक में वो सीन ओके कर दिया।

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