पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन ने हाल ही में अपने ठिकानों को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया है। भारतीय रक्षा और सैन्य सूत्रों के मुताबिक, यह कदम भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद उठाया गया है, जिसने आतंकी संगठनों की कमर तोड़ दी। माना जा रहा है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने आतंकियों के मन में इतना खौफ भर दिया है कि अब वे PoK में रहने का रिस्क नहीं उठाना चाहते।
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आतंकी ठिकानों को किया गया था जमींदोज
7 मई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया। इस ऑपरेशन का मकसद था पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में आतंकी ढांचे को पूरी तरह तबाह करना। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने बहावलपुर, मुरीदके, मुजफ्फराबाद और कई अन्य स्थानों पर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए उन्हें जमींदोज कर दिया। 4 दिन तक चली इस सैन्य कार्रवाई में आतंकी संगठनों को भारी नुकसान हुआ।
10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच एक समझौता हुआ, जिसके बाद सैन्य कार्रवाइयां बंद हुईं। इस ऑपरेशन ने आतंकी संगठनों में खौफ पैदा कर दिया। PoK, जो पहले आतंकियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना था, अब उनके लिए खतरे की जगह बन गया। भारतीय सेना की ताकत और सटीक हमलों ने आतंकी संगठनों को मजबूर किया कि वे अपने ठिकानों को PoK से हटाकर KPK की तरफ ले जाएं।
KPK क्यों बना आतंकियों की नई पनाहगाह?
KPK, जो अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है, आतंकी संगठनों के लिए एक रणनीतिक ठिकाना है। सूत्रों के मुताबिक, KPK की भौगोलिक स्थिति इसे आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनाती है। इस इलाके में पहाड़ी क्षेत्र और अफगान सीमा की नजदीकी आतंकियों को छिपने और अपनी गतिविधियां चलाने में मदद करती है। इसके अलावा, KPK में पाकिस्तानी सेना और स्थानीय प्रशासन का नियंत्रण कमजोर है, जिसका फायदा आतंकी संगठन उठा रहे हैं।

PoK में भारतीय सेना की बढ़ती निगरानी और हमलों के डर ने आतंकी संगठनों को मजबूर किया कि वे KPK की तरफ भागें। यह एक रणनीतिक बदलाव है, जिसके तहत आतंकी संगठन अब PoK को अपने लिए असुरक्षित मान रहे हैं। KPK में उन्हें न केवल छिपने की जगह मिल रही है, बल्कि पाकिस्तान की सरकार और स्थानीय संगठनों का समर्थन भी हासिल हो रहा है।
पाकिस्तान ने आतंकियों को दी है खुली छूट
भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार किए गए एक डोजियर में साफ तौर पर कहा गया है कि आतंकी संगठनों का यह ट्रांसफर पाकिस्तान सरकार की जानकारी और समर्थन के साथ हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और स्थानीय प्रशासन का पूरा सहयोग मिल रहा है। हाल ही में KPK के मानसेहरा जिले के गढ़ी हबीबुल्लाह कस्बे में जैश-ए-मोहम्मद ने एक सार्वजनिक भर्ती अभियान चलाया। यह घटना 14 सितंबर को भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच शुरू होने से करीब 7 घंटे पहले हुई।
इस भर्ती अभियान को जैश के आतंकी मौलाना मुफ्ती मसूद इलियास कश्मीरी उर्फ अबु मोहम्मद ने अंजाम दिया। इलियास कश्मीरी भारत में वॉन्टेड एक हाई-प्रोफाइल आतंकी है और जैश के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर का करीबी सहयोगी है। भर्ती के दौरान M4 राइफलों से लैस जैश के आतंकी और स्थानीय पुलिस दोनों मौजूद थे। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान सरकार आतंकी संगठनों को न केवल संरक्षण दे रही है, बल्कि उनकी गतिविधियों को बढ़ावा भी दे रही है।

भारत की बढ़ती ताकत से आतंकियों में खौफ
ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, बल्कि यह भी साबित किया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाना शुरू कर चुका है। भारतीय सेना की सटीक कार्रवाइयों और खुफिया तंत्र की मजबूती ने आतंकी संगठनों में दहशत पैदा कर दी है। PoK, जो पहले आतंकियों के लिए एक मजबूत गढ़ था, अब उनके लिए खतरे की घंटी बन चुका है।
KPK में आतंकी संगठनों का जाना दिखाता है कि वे भारत के हमलों से बचने के लिए नई जगहों की तलाश में हैं। लेकिन भारत की खुफिया एजेंसियां और सेना इस बदलाव पर कड़ी नजर रख रही हैं। आतंकी संगठन अब खुले तौर पर PoK में अपनी गतिविधियां नहीं चला सकते, क्योंकि भारत की सेना और खुफिया तंत्र उनकी हर हरकत पर नजर रख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी सख्त कदम उठाने की जरूरत
'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे अभियानों ने साफ कर दिया है कि भारत अब आतंकियों के खिलाफ न केवल रक्षात्मक, बल्कि आक्रामक रुख भी अपनाएगा। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां KPK में आतंकी संगठनों की नई गतिविधियों पर नजर रख रही हैं और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाइयां जारी रखने की योजना बना रही हैं। पाकिस्तान की सरकार और सेना की आतंकियों को दी जा रही खुली छूट एक गंभीर चिंता का विषय है। यह न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए खतरा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी इस मामले में सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि पाकिस्तान पर आतंकियों को संरक्षण देने का दबाव बनाया जा सके।