जामनगर: सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा (ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर और राधे कृष्ण टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट) के खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार करते हुए वनतारा के पशु कल्याण और संरक्षण प्रयासों की जमकर तारीफ की। साथ ही, बार-बार एक ही तरह की शिकायतों को प्रक्रिया का दुरुपयोग करार देते हुए भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगा दी। SIT की जांच में कई अहम चीजें सामने आईं जिन्होंने मामले को पूरी तरह साफ कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त 2025 को वनतारा के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम गठित की थी, जिसमें रिटायर्ड जज और सीनियर अधिकारी शामिल थे। SIT ने सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA), CBI, ED, DRI, कस्टम्स, और CITES जैसी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर गहन जांच की। रिकॉर्ड्स, हलफनामों, साइट विजिट, एक्सपर्ट ओपिनियन, और व्यक्तिगत सुनवाई के आधार पर SIT ने निम्नलिखित निष्कर्ष दिए:
सुप्रीम कोर्ट ने SIT की रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार करते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा के खिलाफ अनियमितताओं की शिकायतों पर 2 जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए एक पूर्व जज की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय SIT बनाई थी। SIT को भारत और विदेश से पशुओं, खासकर हाथियों, को लाने, वन्यजीव संरक्षण कानूनों, चिड़ियाघर नियमों, आयात-निर्यात कानूनों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के पालन की जांच करने को कहा गया था। साथ ही, पशुओं की देखभाल, कल्याण, मृत्यु दर, जलवायु परिस्थितियों, औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थान, निजी संग्रह, प्रजनन, संरक्षण और जैव विविधता के उपयोग से जुड़ी शिकायतों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था।
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