Choker atta in diabetes: जितना महीन आपका आटा होगा, उतनी ही तेजी आपका शुगर बढ़ेगा। ऐसे में जरूरी ये है कि आप महीन आटा खाने से बचें। दरअसल, महीन आटा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है और फाइबर उतना ही कम। फाइबर कम होने की वजह से आपका शुगर तेजी से बढ़ता है और मेटाबोलिज्म स्लो रहता है। ऐसी स्थिति में आपको आटा नहीं, इससे निकलने वाले चोकर का सेवन करना चाहिए।
चोकर का दरदरापन शुगर मेटाबोलिज्म को तेज करता है और इसके स्पाइक को रोकता है। इसका फाइबर शुगर सोखने में मददगार है और पेट का मेटाबोलिक रेट बढ़ाता है। इससे होता ये है कि खाने से निकलने वाला शुगर अपने आप पच जाता है।

चोकर का आटा इंसुलिन प्रोडक्शन में मददगार है। ये शरीर में इंसुलिन हार्मोन को तेज करने के साथ, इसके प्रोडक्शन को बढ़ाता है। ये इंसुलिन खून में शुगर को मिलने से रोकता है और डायबिटीज कंट्रोल करने में मददगार है।
चोकर शुगर स्पाइक को रोकता है और फास्टिंग शुगर को बढ़ने नहीं देता। इसके अलावा ये शुगर में कब्ज की समस्या को दूर करता है क्योंकि ये बॉवेल मूवमेंट को तेज करता है, आंतों की गति बढ़ाता है जिससे, शुगर मैनेज करने में मदद मिलती है।
डायबिटीज में चोकर खाने के लिए पहले, आटे से चोकर निकाल (choker atta kaise banaye) कर रख लें। या फिर ज्यादा चोकर वाला आटा ही खरीद दें। इसे ऐसे समझें कि अगर आप 1 कप आटा लें तो 2 कप इसमें चोकर मिलाएं। फिर इससे आप रोटी बनाएं या थेपला, सेहत के लिए सब फायदेमंद होगा। तो, इन तमाम कारणों से आपको डायबिटीज में आटे के चोकर का सेवन करना चाहिए।
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