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कमजोर फेफड़ों वाले लोगों में कोरोना वायरस का खतरा सबसे अधिक, स्टडी में सामने आई बात

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ की तरफ से कहा गया है कि कमजोर फेफड़े वालों को कोरोना का खतरा ज्यादा है।

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Updated on: March 20, 2020 15:09 IST
Coronavirus- India TV Hindi
Coronavirus

कोरोना वायरस से भारत की नहीं बल्कि दुनियाभर के कई देश परेशान हैं। इसे वैश्विक महामारी घोषित किया जा चुका है। वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की लगातार  कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच एक स्टडी सामने आई है जिसमें कहा गया कि फेफड़ों की समस्याओं से पीड़ित लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा अधिक है। दरअसल यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ ने कोरोना वायरस पर स्टडी की और पता लगाया है कि जिन लोगों में सांस से जुड़ी कोई भी परेशानी है, उन्हें कोरोनावायरस का ज्यादा खतरा है। जिसके बाद लोगों के बीच रेस्पिरेटरी हाइजीन को लेकर जागरूकता फैलाना की बात कही जा रही हैं। 

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ ने अपने शोध में बताया कि कोरोना वायरस की शुरुआत देखी जाए तो रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी परेशानी है। वहीं कोरोना वायरस को SARS (severe acute respiratory syndrome) है। इस सिंड्रोम को क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज या सीओपीडी के नाम से जानी जाती है। यह एक क्रोनिक प्रोग्रेसिव लंग डिजीज है, जो लंबे समय तक सांस लेने में तकलीफ का कारण बनती है। इसकारण आज के समय किसी व्यक्ति को रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी कोई भी परेशानी है है तो उसके लिए कोरोना वायरस खतरनाक हो सकता है। 

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यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के सह वैज्ञानिक वेजेश जैन ने इस शोध का रिजल्ट बताते हुए कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों और डॉक्टरों को कोरोना वायरस के साथ   गंभीर बीमारी के उच्चतम जोखिम वाले ऐसे लोगों को प्राथमिकता देने में मदद करनी चाहिए। COVID-19 नामक बीमारी एक श्वसन संक्रमण है, जो गंभीर मामलों में सांस और फेफड़ों की विफलता का कारण बनती है। वहीं इनके सबसे आम लक्षण बुखार और खांसी हैं।

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने इस स्टडी में चीन के 7 छोटे अध्ययनों के रिजल्ट को भी गहराई से पढ़ा और इसमें कुल 1,813 मरीज शामिल थे, जिनमें से सभी COVID-19 के संक्रमण से पीड़ित थे। इस दौरान देखा गया कि सांस से जुड़ी परेशानी वाले मरीजों में  कोरोना वायरस होने का जोखिम ज्यादा था। जिन्हें काफी अच्छी देखभाल की जरुरत है। 

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आपको बता दें कि कोरोना वायरस अभी तक करीब 148 देशों में फैल चुका है। भारत में अभी तक 195 मामले सामने आ चुके है। इसके साथ लही 4 लोगों की मौत हो चुकी है। इस कारण अपनी हाइजीन का पूरा ध्यान रखें। कोरोना वायरस से बचने कि लिए घर सुरक्षित रहें। संक्रमित व्यक्ति से 1 मीटर की दूरी बनाकर रखें। समय-समय पर अपने हाथ साबुन से धोते रहें। 

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