नवंबर का आधा महीना गुज़र चुका है और अब सुबह-शाम की ठंड बढ़ने से स्वेटर--जैकेट्स निकल आए हैं। आने वाले हफ्तों में सर्दी और बढ़ेगी। शीत लहर के साथ कड़ाके की ठंड भी पड़ेगी। यानी कोल्ड, कफ और फीवर के मरीजों की तादाद भी बढ़ेगी। इस मौसम में होने वाली ये सबसे आम परेशानियां है। लेकिन अगर बार बार सर्दी-जुकाम हो, गले में स्वेलिंग-दर्द, बॉडी पेन हो, हर वक्त आलस-थकान से कुछ करने का मन ना करें तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल ना करें। क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये थायरोक्सिन हार्मोन इंबैलेंस होने के लक्षण भी हो सकते हैं। शायद कम ही लोगों को पता होगा कि ठंड के मौसम में शरीर को गर्म रखने का काम सांस की नली के ऊपर मौजूद तितली के शेप का थायराइड ग्लैंड ही करता है। जब सर्दी ज्यादा पड़ती है तो बॉडी को गर्म रखने के लिए इस ग्लैंड पर भी प्रेशर पड़ता है। ऐसे में हाइपो थायराइड के मरीजों में थायरोक्सिन हार्मोन कम बनने से बॉडी की ठंड से लड़ने की ताकत घटने लगती है। इसे cold intolerance भी कहते है। इस कंडीशन में मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। नतीजा वजन और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से दिल पर खतरा मंडराने लगता है।
थायराइड डिस्टर्ब होने से अस्थमा, डिप्रेशन, डायबिटीज और अर्थराइटिस का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है।। कम उम्र में सांस फूलने लगती है। सही वक्त पर ट्रीटमेंट ना लिया जाए तो थायराइड कैंसर तक हो जाता है। दुनिया भर में हुई रिसर्च बताती हैं कि पिछले कुछ साल में इस कैंसर के मरीज 3 गुना बढ़े हैं। महिलाओं में तो थायराइड कैंसर का रेट पुरुषों से लगभग चार गुना ज़्यादा है। रिसर्च गेट की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक 30 से कम उम्र की महिलाओं में इस तरह के कैंसर के मामले 121% बढ़े हैं।
पब्लिक हेल्थ अपडेट की स्टडी से पता चला है कि पूरी दुनिया में इस वक्त 20 करोड़ से ज़्यादा थायराइड पेशेंट हैं, अकेले भारत में हर 10 में से 1 शख्स इस बीमारी का शिकार है। यानि देश में हर दसवें इंसान को सर्दी में खास ध्यान रखने की ज़रूरत है। सिर्फ थायराइड पेशेंट ही नहीं बल्कि हर किसी को ठंड में अलर्ट रहना चाहिए। ज़रा सी चूक उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। तो चलिए बिना देर किए स्वामी रामदेव के पास चलते हैं और सर्दी में थायराइड के अटैक से बचने के उपाय जानते हैं।
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