कोरोना से रिकवरी के बाद कमजोर हड्डियों के कारण 'बोन डेथ' का खतरा, स्वामी रामदेव से जानें उपाय
कोरोना से रिकवरी के बाद कमजोर हड्डियों के कारण 'बोन डेथ' का खतरा, स्वामी रामदेव से जानें उपाय
Written by: India TV Health Desk
Published : Jul 10, 2021 10:30 am IST,
Updated : Jul 10, 2021 10:35 am IST
हड्डियों के कमजोर होने के पीछे बहुत से कारण हो सकते हैं। लेकिन, लाइफस्टाइल में बदलाव करके और नियमित रूप से योगाभ्यास करके बोन्स को मजबूत बनाया जा सकता है।
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इंडिया टीवी पर स्वामी रामदेव
कोरोना से रिकवरी के बाद मरीजों में कई तरह की स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां देखने को मिल रही हैं। किसी को हाई बीपी, शुगर की परेशानी है तो किसी को ब्लड क्लॉटिंग, हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक। शरीर का कोई ऐसा अंग नहीं बचता, जिस पर वायरस ने अपना असर ना छोड़ा हो। फिर चाहे वो मसल्स हो, हड्डियां हो या फिर ज्वॉइंट्स। कोरोना से रिकवरी के बाद लोग सबसे ज्यादा कमजोरी और बदन दर्द से परेशान हुए हैं। इंफेक्शन की वजह से ज्वॉइंट्स में भी दर्द होता है।
वहीं, वायरस मसल्स फाइबर को भी डैमेज करता है, उसे कमजोर करता है, जिसकी वजह से पूरे शरीर में दर्द होता है। अर्थराइटिस, ज्वॉइंट पेन ऐसी ही ओल्ड एज बीमारी है। ज्यादातर बुजुर्ग इससे परेशान रहते हैं और ऊपर से जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है, जिनमें प्रोटीन, विटामिन डी और कैल्शियम की कमी होती है, उनकी भी बॉडी, बोन्स और ज्वॉइंट्स में दर्द होता है और परेशानी रहती है। कोरोना इन परेशानियों को और बढ़ा देता है। ऐसे में हड्डियों से जुड़ी तमाम तरह की परेशानियों को दूर करने और इन्हें मजबूत बनाने के लिए स्वामी रामदेव से जानें योग और आयुर्वेदिक उपचार।
क्या है 'बोन डेथ' ?
कोरोना की वजह से हड्डियां गलने लगती हैं
धीरे-धीरे बोन सेल्स डी-जेनरेट होने लगता है
जोड़ों पर होता है सबसे ज्यादा असर
कोरोना के बाद हड्डियों में असर
वायरस के प्रभाव से हड्डियों में खून की सप्लाई बंद
परेशानी की वजह
विटामिन की कमी
हॉर्मोन्स
बढ़ा हुआ वजन
मिनरल की कमी
जेनेटिक
यूरिक एसिड बढ़ना
हड्डियों में ताकत के लिए करें ये योगासन
सूक्ष्म व्यायाम
100-100 बार करें
बॉडी को एक्टिव करता है
शरीर में थकान नहीं होती है
कई तरह के दर्द से राहत
ऊर्जा का संचार करता है
शरीर पूरा दिन चुस्त रहता है
मकरासन
लंग्स मजबूत करता है
तनाव दूर करता है
पेट से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद
कमर दर्द में आराम
भुजंगासन
फेफड़ों, कंधों, सीनों को सेट्रेच करता है
रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है
किडनी को स्वस्थ बनाता है
तनाव, चिंता, डिप्रेशन दूर होता है
छाती चौड़ी होती है
लिवर से जुड़ी दिक्कतें दूर होती हैं
कमर का निचला हिस्सा मजबूत होता है
शलभासन
फेफड़े सक्रिय होते हैं
तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाता है
खून को साफ करता है
शरीर को मजबूत और लचीला बनाता है
हाथों और कंधों की मज़बूती बढ़ाता है
मर्कटासन
रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है
पीठ का दर्द दूर हो जाता है
फेफड़ों के लिए फायदेमंद
पेट संबंधी समस्या दूर होती है
एकाग्रता बढ़ती है
गुर्दे, अग्नाशय, लीवर सक्रिय होते हैं
उष्ट्रासन
किडनी को स्वस्थ बनाता है
मोटापा दूर करने में सहायक
शरीर का पोश्चर सुधरता है
पाचन प्रणाली को ठीक होती है
टखने के दर्द को दूर भगाता है
कंधों और पीठ को मजबूत करता है
पीठ दर्द में बेहद लाभकारी
फेफड़ों को स्वस्थ बनाने में मददगार
मंडूकासन
डायबिटीज को करे कंट्रोल
पेट और हृदय के लिए भी लाभकारी
कंसंट्रेशन की क्षमता बढ़ती है
पाचन तंत्र सही करने में सहायक
लीवर, किडनी को स्वस्थ रखता है
वजन घटाने में मदद करता है
पैन्क्रियाज से इंसुलिन रिलीज करता है
डायबिटीज को रोकने में सहायक
गैस और कब्ज की समस्या दूर होती है
पवनमुक्तासन
फेफड़े स्वस्थ और मजबूत रहते हैं
अस्थमा, साइनस में लाभकारी
किडनी को स्वस्थ रखता है
ब्लड प्रेशर को सामान्य रखता है
पेट की चर्बी को दूर करता है
मोटापा कम करने में मददगार
हृदय को सेहतमंद रखता है
ब्लड सर्कुलेशन ठीक होता है
रीढ़ की हड्डी मज़बूत होती है
हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए योग के साथ करें ये प्राणायाम
अनुलोम-विलोम
सबसे पहले पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अब दाएं हाथ की अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बाएं नाक पर रखें और अंगूठे को दाएं वाले नाक पर लगा लें। तर्जनी और मध्यमा को मिलाकर मोड़ लें। अब बाएं नाक की ओर से सांस भरें और उसे अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बंद कर लें। इसके बाद दाएं नाक की ओर से अंगूठे को हटाकर सांस बाहर निकाल दें। इस आसन को 5 मिनट से लेकर आधा घंटा कर सकते हैं। इस प्राणायाम से नाक खुल जाती है। इम्यून सिस्टम को करें ठीक। तनाव और डिप्रेशन से दिलाएं निजात।
भस्त्रिका
इस प्राणायाम को करने से पूरे शरीर में ऑक्सीजन का ठीक ढंग से प्रवाह होता है। जिससे आपको डायबिटीज के साथ-साथ कई अन्य बीमारियों से भी निजात मिल जाएगा।
कपालभाति
सांस लेने में आसान हो जाता है। फेफड़ों को ऑक्सीजन मिलती है। हड्डियों की मजबूती करें। इसके साथ ही जोड़ों से आने वाली आवाज को करें बंद करें। इससे साथ-साथ शरीर में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा देता है।