Monday, January 19, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. क्या आप जानते हैं पाकिस्तान को टॉस में हराकर भारत ने जीती थी राष्ट्रपति की बग्घी

क्या आप जानते हैं पाकिस्तान को टॉस में हराकर भारत ने जीती थी राष्ट्रपति की बग्घी

आजादी के वक्त जब भारत के दो हिस्से हुए तो उस वक्त इस शाही बग्घी को लेकर काफी विवाद हुआ। भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों ने इस बग्घी पर अपना दावा जताया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये था कि आखिर ये शाही बग्घी किसे दिया जाए। लिहाजा इसके लिए एक नायाब तरीका

Written by: India TV News Desk
Published : Jul 25, 2017 11:21 am IST, Updated : Jul 25, 2017 11:21 am IST
buggy- India TV Hindi
buggy

नई दिल्ली: आज जमाना रफ्तार का है लेकिन राष्ट्रपति की शाही सवारी बग्घी की बात ही अलग है। इस बग्घी में जितना सोना लगा है उससे महंगी से महंगी कार खरीदी जा सकती है। राष्ट्रपति की ये शाही बग्घी इतिहास को खुद में समेटे हुए है। ये बग्घी आजादी की लड़ाई की कहानी बयां करती है और आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि आजादी के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ने बग्घी पर दावा किया था जिसका फैसला टॉस करके किया गया।

आजादी से पहले वायसराय और आजादी के बाद के कई साल तक देश के राष्ट्रपति इस शाही बग्घी की सवारी करते आए हैं। इस फेहरिस्त में देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू से लेकर प्रणब दा तक का नाम शामिल है। भारत में संविधान लागू होने के बाद 1950 में हुए पहले गणतंत्र दिवस समारोह में देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद बग्घी पर ही सवार होकर गणतंत्र दिवस समारोह में पहुंचे थे।

आजादी के वक्त जब भारत के दो हिस्से हुए तो उस वक्त इस शाही बग्घी को लेकर काफी विवाद हुआ। भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों ने इस बग्घी पर अपना दावा जताया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये था कि आखिर ये शाही बग्घी किसे दिया जाए। लिहाजा इसके लिए एक नायाब तरीका ढूंढा गया।

इसके लिए वायसराय की अंगरक्षक टुकड़ी के तत्कालीन हिंदू कमांडेंट और मुस्लिम डिप्टी कमांडेंट के बीच सिक्का उछालकर टॉस किया गया। टॉस में भारत की जीत हुई और ये बग्घी हमेशा-हमेशा के लिए भारत की होकर रह गई।

राष्ट्रपति की ये शाही बग्घी बेहद ही खास है। सोने से सजी-धजी इस बग्घी के दोनों ओर भारत का राष्ट्रीय चिह्न सोने से अंकित है। इसे खींचने के लिए 6 घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। ये घोड़े भी विशेष नस्ल के होते हैं। इसके लिए खास तौर से भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई मिक्स ब्रीड के घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। आजादी के बाद 1950 से लगातार 1984 तक सरकारी कार्यक्रमों में बग्घी का इस्तेमाल होता था। बाद में इसे रोक दिया गया लेकिन 2012 में प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद इस परंपरा को फिर से शुरू किया गया।

ये भी पढ़ें: अगर सांप काटे तो क्या करें-क्या न करें, इन बातों का रखें ध्यान...

इस राजा की थी 365 रानियां, उनके खास महल में केवल निर्वस्‍त्र हीं कर सकते थे एंट्री

Latest India News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत

Advertisement
Advertisement
Advertisement