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‘बहुत खराब’ है दिल्ली की हवा, सोमवार से हालात और खराब होने की चेतावनी

आंकड़े के अनुसार, दिल्ली में चार इलाकों में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ स्तर पर है जबकि 29 इलाकों में ‘बेहद खराब’ दर्ज की गई है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: November 03, 2018 7:21 IST
‘बहुत खराब’ है दिल्ली की हवा, सोमवार से हालात और खराब होने की चेतावनी- India TV
‘बहुत खराब’ है दिल्ली की हवा, सोमवार से हालात और खराब होने की चेतावनी

नयी दिल्ली: दिवाली में प्रदूषण बढ़ने की आशंका के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तमाम कदम उठाए गए हैं और पराली जलाने के मामलों में भी थोड़ी कमी आई है जिसकी वजह से प्रदूषण का स्तर थोड़ा कम तो हुआ लेकिन अधिकारियों ने अगले सप्ताह से हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ रूप से खराब होने की चेतावनी दी है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 370 दर्ज किया गया जो ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में आता है। पीएम 2.5 का स्तर 210 दर्ज किया गया। यह कण पीएम 10 से भी छोटे होते हैं और स्वास्थ्य को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।

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आंकड़े के अनुसार, दिल्ली में चार इलाकों में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ स्तर पर है जबकि 29 इलाकों में ‘बेहद खराब’ दर्ज की गई है। केन्द्र द्वारा संचालित वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली (एसएएफएआर) के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में पीएम10 का स्तर 334 बना हुआ है। एसएएफएआर का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर का वायु गुणवत्ता सूचकांक अगले तीन दिन तक ‘बेहद खराब’ की श्रेणी में बना रहेगा।

एसएएफएआर की वेबसाइट के अनुसार, ‘‘यह मुख्य रूप से मौसमी हालात के कारण है क्योंकि पराली जलने की भागीदारी इसमें बहुत कम रह गई है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में नमी का बढ़ना और चार नवंबर तक जारी रहेगा। इसके कारण वातावरण में पीएम 2 .5 की धारण क्षमता भी बढ़ेगी।’’ अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली का एक्यूआई पांच नवंबर तक ‘बहुत खराब’ श्रेणी की उच्च रेंज में रहेगा और उसके बाद यह मौसम के प्रतिकूल हालात की वजह से और भी बिगड़ सकता है।

वायु प्रदूषण बढ़ा रहा युवाओं में स्ट्रोक का खतरा

सूक्ष्म वायु प्रदूषण कण युवाओं और स्वस्थ लोगों की नसों और नब्ज की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाकर उनमें स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल अनुसंधान संस्थान के न्यूरोलॉजी निदेशक प्रवीण गुप्ता ने कहा कि पिछले कई वर्षो में युवा मरीजों की संख्या बढ़ी है।

गुप्ता ने कहा, "हर महीने कम से कम से तीन युवा मरीज हमारे पास आ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षो की तुलना में स्ट्रोक के युवा मरीजों की संख्या करीब दोगुनी हो गई है। अध्ययन में बताया गया कि इसका सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण है और धूम्रपान अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों ही मामलों में स्ट्रोक के मामलों को बढ़ा रहा है।" विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता पहले से ही जहरीली है और इस तरह का उच्च प्रदूषण स्तर स्ट्रोक की दर को बढ़ा रहा है।

वॉकिंग और जॉगिंग से रहें दूर
सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड के नेतृत्व वाले टास्क फोर्स ने कहा था कि राजधानी में हवा की धीमी गति के कारण प्रदूषण बढ़ सकता है। ऐसे में नवंबर के पहले 10 दिनों तक यहां के निवासियों को वॉकिंग और जॉगिंग से दूर रहना चाहिए। बोर्ड ने पलूशन को देखते हुए 1 से 10 नवंबर तक दिल्ली-एनसीआर में सभी तरह की कंस्ट्रक्शन ऐक्टिविटी पर पहले ही रोक लगा दी है। 4 से 10 नवंबर तक कोल और बायोगेस से चलने वाली सभी इंडस्ट्री को बंद रखने का सुझाव भी दिया गया है। 1 से 10 नवंबर तक प्रदूषण फैला रही गाड़ियों पर कड़ी कारवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

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