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UN बैठक में बोले PM मोदी-भूमि क्षरण दुनिया के दो तिहाई हिस्से को कर रहा प्रभावित

Edited by: IndiaTV Hindi Desk Published : Jun 14, 2021 09:15 pm IST, Updated : Jun 14, 2021 10:33 pm IST

प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के वर्चुअली उच्च स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भूमि क्षरण ने दुनिया के दो-तिहाई हिस्से को प्रभावित किया और यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह समाजों, अर्थव्यवस्थाओं, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता व सुरक्षा की नींव को कमजोर कर देगा।

PM Modi addresses high-level virtual UN meet on desertification, land degradation, drought- India TV Hindi
Image Source : PIB प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के वर्चुअली उच्च स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया।

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के वर्चुअली उच्च स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सोमवार की शाम को कहा कि भूमि क्षरण ने दुनिया के दो-तिहाई हिस्से को प्रभावित किया और यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह समाजों, अर्थव्यवस्थाओं, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता व सुरक्षा की नींव को कमजोर कर देगा। प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र में ‘मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे’ के बारे में उच्च स्तरीय संवाद को डिजिटल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मरुस्थलीकरण से निपटने में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीसीडी) के सभी पक्षों के 14वें सत्र के अध्यक्ष के रूप में प्रारंभिक सत्र को संबोधित किया। 

पीएम मोदी ने कहा कि भूमि जीवन और आजीविका के लिए मूलभूत अंग है और सभी को इसे समझाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘दुखद है कि भूमि क्षरण ने आज दुनिया के दो-तिहाई हिस्से को प्रभावित किया है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह हमारे समाजों, अर्थव्यवस्थाओं, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता व सुरक्षा की नींव को कमजोर कर देगा।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हमें भूमि और इसके संसाधनों पर भयंकर दबाव को कम करना होगा। अभी आगे बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हम साथ मिलकर इसे कर सकते हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में भूमि को हमेशा से महत्व दिया जाता रहा है और इसे लोग अपनी माता भी मानते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने भूमि क्षरण को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा बनाया है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने 30 लाख हेक्टेयर जमीन को जोड़ा है। उल्लेखनीय है कि इस उच्चस्तरीय संवाद में मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे से निपटने में किये गये प्रयासों में हुई प्रगति का आकलन किया जाना है। साथ ही इसमें मरुस्थलीकरण के खिलाफ संघर्ष करने और पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने के बारे में संयुक्त राष्ट्र की कार्य योजना भी तैयार की जाएगी। 

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