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Article-370: अनुच्छेद-370 हटने के 3 साल पूरे, कश्मीर की राजनीतिक पार्टियां अभी भी कर रही फैसले को वापस लेने की मांग

 Written By: Pankaj Yadav
 Published : Aug 05, 2022 11:02 pm IST,  Updated : Aug 05, 2022 11:02 pm IST

Article-370: 2019 में आज के ही दिन जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था। भाजपा सरकार में लिए गए इस फैसले का विरोध जम्मू कश्मीर के कई राजनीतिक दलों ने किया। आज 370 के हटने को 3 साल हो चुके हैं।

Protest Against Article-370- India TV Hindi
Protest Against Article-370 Image Source : TWITTER

Highlights

  • 5 अगस्त 2019 को हटाया गया था अनुच्छेद 370
  • आजादी के बाद जम्मू कश्मीर को लेकर बड़ा फैसला
  • कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों ने किया प्रदर्शन

Article-370: पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए तीन साल पहले आज ही के दिन जम्मू-कश्मीर के लोगों से उनका विशेष दर्जा ‘छीनने’ का आरोप लगाया। दोनों दलों ने केंद्र से इस फैसले को वापस लेने की मांग दोहराई। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने इस अवसर पर एक बैठक की और तीन साल पहले पांच अगस्त को केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसलों को उच्चतम न्यायालय द्वारा पलटे जाने की उम्मीद जताई। पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी बनाते हुए तत्कालीन राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांट दिया था। 

श्रीनगर पुलिस ने किया ट्वीट

शुक्रवार को पूरे कश्मीर में आम जनजीवन सामान्य रहा और बाजार, स्कूल और अन्य प्रतिष्ठान खुले रहे। श्रीनगर पुलिस ने ट्विटर पर लाल चौक पर सामान्य स्थित दर्शाने वाला 13 सेकेंड का वीडियो साझा करते हुए लिखा, “बंद के आह्वान पर ध्यान न देते हुए सभी दुकानें खुली हैं और श्रीनगर जिले में स्थिति बिल्कुल सामान्य है। ये दृश्य लाल चौक इलाके के हैं।” 

फैसले के विरोध में PDP कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन

पूर्व मुख्यमंत्री और PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती केंद्र के इन फैसलों के प्रति विरोध जताने के लिए शुक्रवार को अपने समर्थकों के साथ श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर म्यूनिसिपल पार्क के पास स्थित पार्टी कार्यालय में एकत्रित हुईं। उन्होंने लाल चौक तक मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने की मांग वाली तख्तियां और बैनर लिए PDP कार्यकर्ताओं को पार्टी कार्यालय के बाहर कुछ समय बैठने की अनुमति दी गई। इस दौरान उन्होंने अनुच्छेद-370 को निष्क्रिय बनाने के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर ‘काले दिन का काला कानून वापस लो’ के नारे लगाए। बाद में वे शांतिपूर्वक तितर-बितर हो गए। 

तिरंगे को भगवा झंडे से बदलने की कोशिश कर रही भाजपा -महबूबा मुफ्ती

महबूबा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी न केवल जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली की लड़ाई लड़ने को प्रतिबद्ध है, बल्कि कश्मीर के मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए भी काम करेगी। उन्होंने आरोप लगाया, “आने वाले समय में वे (केंद्र) संविधान और उस नींव को नष्ट कर देंगे, जिस पर यह देश खड़ा है। वे इसे एक धार्मिक राष्ट्र बनाएंगे और तिरंगे को भगवा ध्वज से बदल देंगे। वे राष्ट्रीय ध्वज को बदल देंगे, जैसा कि उन्होंने हमारे संविधान और झंडे के साथ किया था। लेकिन जो हमसे छीन लिया गया है, उसकी बहाली के लिए हम लड़ाई लड़ने को प्रतिबद्ध हैं। ”

ट्वीट कर सरकार पर साधा निशाना

पीडीपी प्रमुख ने बाद में ट्वीट किया, “जम्मू-कश्मीर के लिए भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) के द्वेषपूर्ण मंसूबों का पर्दाफाश हो गया है। दमन और भय की रणनीति अब देश के बाकी हिस्सों के दरवाजे पर भी दस्तक दे रही है। असहमति को दबाने के लिए अपनी पालतू एजेंसियों को शक्तियां देना और आतंकी कानूनों का इस्तेमाल करना ढर्रा बन गया है।” उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती राज्य विकास से जुड़े सूचकांकों में नीचे ‘लुढ़क गया’ है। पीडीपी प्रमुख ने भाजपा के नारे पर कटाक्ष करते हुए कहा, “बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। सामान्य स्थिति का मुखौटा उतना ही वास्तविक है, जितना ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा।” उन्होंने देश के बाकी हिस्सों के राजनीतिक दलों की तरफ इशारा करते हुए कहा, “आपकी चुप्पी और मिलीभगत ने भारत सरकार को कहर बरपाने ​​​​के लिए प्रोत्साहित किया। आज वे भारतीय लोकतंत्र का समर्थन करने वाले हर स्तंभ को तोड़कर उसे कुचल रहे हैं। भाजपा का जम्मू-कश्मीर का तथाकथित एकीकरण, जो कभी नहीं हुआ, उसकी हमें भारी कीमत चुकानी पड़ी है।” 

पांच अगस्त 2019 का फैसले हमें स्वीकार्य नहीं -कांग्रेस

उधर, पूर्व मंत्री तारिक कर्रा और ताज मोहिउद्दीन के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक समूह ने भी अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया और पूर्ववर्ती राज्य के विशेष दर्जे की बहाली की मांग की। श्रीनगर में मौलाना आजाद रोड स्थित पार्टी कार्यालय के अंदर जमा हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने सड़कों पर नहीं निकलने दिया। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने नवाई-सुभ में पार्टी की बैठक की अध्यक्षता की। पार्टी प्रवक्ता ने अब्दुल्ला के हवाले से ट्वीट किया, “पांच अगस्त 2019 भरोसे के उल्लंघन का प्रतीक है, फैसले हमें स्वीकार्य नहीं हैं। हमें उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय एकतरफा, अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक फैसलों को उलट देगा। हम हमारे अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाना जारी रखेंगे।” 

फैसले के खिलाफ संघर्ष शांतिपूर्ण ढंग से जारी रखेंगे -उमर अब्दुल्ला

पार्टी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी अनुच्छेद-370 की बहाली के लिए सभी कानूनी, संवैधानिक और शांतिपूर्ण उपायों का सहारा लेने का संकल्प लिया। उन्होंने ट्वीट किया, “पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर के साथ जो किया गया था, उसे चुनौती देने के लिए हम सभी कानूनी और संवैधानिक उपायों का इस्तेमाल करते हुए अपना संघर्ष शांतिपूर्ण ढंग से जारी रखेंगे। आगे की राह लंबी हो सकती है, यह उतार-चढ़ाव से भरी हो सकती है, लेकिन जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस इसे छोड़ेगी नहीं।” अब्दुल्ला की पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने पोस्टर लगाते हुए कहा, “हम जम्मू-कश्मीर के लोगों का मताधिकार छीनने और उन्हें अशक्त बनाने के प्रयासों को खारिज करते हैं। पार्टी ने शीर्ष अदालत से मामले में सुनवाई शुरू करने के लिए एक पीठ का गठन करने का आग्रह किया।

हमसे जो छीना गया, उसे हम वापस लेकर रहेंगे -एम वाई तारिगामी

वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता एम वाई तारिगामी ने ट्वीट किया, “2019 में इसी दिन केंद्र सरकार ने संविधान को खत्म कर दिया और रातों-रात हजारों लोगों को कैद कर जम्मू-कश्मीर से वो छीन लिया, जो उसने एक कठिन लड़ाई के बाद बड़ी मुश्किल से हासिल किया था। हमसे जो छीना गया था, हम उसकी बहाली के लिए एकजुट होकर काम करने का दृढ़ संकल्प दोहराते हैं।” भाजपा के जम्मू-कश्मीर प्रभारी तरुण चुग ने हालांकि, दावा किया कि विशेष दर्जे को समाप्त किए जाने के बाद पूर्ववर्ती राज्य आतंकवाद मुक्त हो गया है।

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