Russia-India on Brahmos-2: रूस और भारत के बीच ब्रह्मोस मिसाइल पर काफी सालों से काम हो रहा है। इस मिसाल की सफलता के बाद इसे और एडवांस बनाने पर रूस और भारत मिलकर काम कर रहे हैं। इसे ब्रह्मोस-2 का नाम दिया गया है। बताया जाता है कि यह हाइपरसोनिक मिसाइल पलक झपकते ही दुश्मन देशों में तबाही मचा देने में सक्षम होगी। इससे पाकिस्तान और चीन जैसे देशों की अकड़ अपने आप ढीली हो जाएगी।
हाल ही में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके रूसी समकक्ष निकोलाई पत्रुशेव ने इससे जुड़ी एक मीटिंग की। मीटिंग के दौरान ब्रह्मोस-2 के हाइपरसोनिक वेरिएंट के जॉइंट डेवलपमेंट की संभावनाओं पर चर्चा की गई। शंघाई सहयोग संगठन के एनएसए स्तर की बैठक से परे, दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारेां यानी एनएसए की मुलाकात के दौरान रूस से रक्षा आपूर्ति और रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर बातचीत हुई। दरअसल, भारत रूस से एस 400 जैसा एंटी मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस टेक्नोलॉजी या फिर सबमरीन, परंपरागत रूप से खरीदार रहा है। इसी क्रम में ब्रह्मोस 2 के एडवांस वर्जन की तैयारियों को लेकर यह बैठक हुई। वैसे देखा जाए तो रूस हाइपरसोनिक मिसाइलों के डेवलपमेंट में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों से आगे है। इसे आधुनिक युद्ध में गेम.चेंजर हथियार माना जाता है।
ब्रह्मोस.2 सुपरसोनिक मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन लगाया जाएगा। जो इसकी ताकत को काफी बढ़ा देगा। स्पीड और ग्लाइड करने की बेहतर क्षमता के साथ इसे विकसित किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक इस मिसाइल की रेंज 600 किमी होगी। इसकी रेंज को बढ़ाकर 1000 किमी किया जा सकता है। ये मिसाइल एंटी शिप और सतह से सतह पर मार करने वाली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल होगी। इसे फाइटर जेट, जंगी जहाज, पनडुब्बी से दागा जा सकता है।
चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों के लिए ब्रह्मोस-2 मिसाइल काफी खतरनाक साबित होगी। इसकी गति इतनी ज्यादा होगी कि यह रडार से भी पकड़ में नहीं आएगी। ये आसमान में ही डायरेक्शन चेंज कर सकती है। हाइपरसोनिक हथियार की विशेषता ये होती है कि ये कम ऊंचाई पर भी उड़ान भरने में सक्षम है। ब्रह्मोस का सुपरसोनिक संस्करण 2.8 मैक की गति से उड़ान भरने में सक्षम होगा।
ब्रह्मोस से जुड़े जानकारों के अनुसार हाइपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस में रूस की जिरकॉन मिसाइल के समान प्रदर्शन करने की विशेषताएं होंगी। इसका मतलब है कि ब्रह्मोस.2 प्रदर्शन के मामले में जिरकॉन मिसाइल के लगभग बराबर होगा। ब्रह्मोस के सीईओ अतुल राणे की मानें तो पहले इसका परीक्षण 2021 में करने का प्लान हुआ था। पर अब कुछ दिक्कतों की वजह से इसका परीक्षण 2027 में किया जा सकता है।
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