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राजा छोड़ गए 20 हजार करोड़ की संपत्ति, 30 साल तक बेटियों ने लड़ी कानूनी लड़ाई, अब सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

Faridkot Royal Property Dispute: ये लड़ाई महारावल खेवाजी ट्रस्ट और महाराज की बेटियों के बीच लड़ी गई है। कोर्ट ने महाराज की वसीयत को खत्म करते हुए महारावल खेवाजी ट्रस्ट को 33 साल बाद भंग करने का फैसला सुनाया।

Written By: Shilpa
Published : Sep 08, 2022 06:09 pm IST, Updated : Sep 08, 2022 06:22 pm IST
Supreme Court Verdict-Faridkot Royal Property Dispute- India TV Hindi
Image Source : PTI Supreme Court Verdict-Faridkot Royal Property Dispute

Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने 30 साल पुराना मामला निपटाया
  • फरीदकोट के महाराज की संपत्ति से जुड़ा था मामला
  • 20 हजार करोड़ के संपत्ति मामले में बेटियों को जीत

Faridkot Royal Property Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए 30 साल पुराने संपत्ति विवाद को खत्म कर दिया है। ये मामला फरीदकोट के महाराज की करीब 20 करोड़ की संपत्ति का है, जिसके हक के लिए उनकी बेटियां 30 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। संपत्ति में हीरे जवाहरात, किला, राजमहल और कई अन्य जगहों पर स्थित इमारतें शामिल हैं। मामले में दो बहनों को जीत मिली है और उन्हें संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा दिए जाने का फैसला बरकरार रखा गया है। सीजेआई यूयू ललित, जस्टिस एस रविंदर भट और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने कुछ सुधार के साथ हाई कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले को बरकरार रखा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को 28 अगस्त को सुरक्षित रख लिया था।  

किस बात के लिए था विवाद?

ये लड़ाई महारावल खेवाजी ट्रस्ट और महाराज की बेटियों के बीच लड़ी गई है। कोर्ट ने महाराज की वसीयत को खत्म करते हुए महारावल खेवाजी ट्रस्ट को 33 साल बाद भंग करने का फैसला सुनाया। ट्रस्ट के सीईओ जागीर सिंह का कहना है, हमें सुप्रीम कोर्ट के मौखिक फैसले के बारे में अभी तक पता नहीं चला है और न ही कोई लिखित आदेश मिला है। इससे पहले जुलाई 2020 में ट्रस्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसके बाद साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने को कहा और ट्रस्ट को देखरेख करने की मंजूरी दी। साल 2013 में चंडीगढ़ की जिला अदालत ने महाराज की दोनों बेटियों अमृत कौर और दीपिंदर कौर के हक में फैसला सुनाया था। जिसके बाद मामला पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा है कि ऐसा लगता है कि ट्रस्ट के लोग संपत्ति हथियाने के लिए साजिश रच रहे हैं और झूठी बातें बता रहे हैं।

आखिर क्या है ये पूरी कहानी?

ये कहानी साल 1918 से शुरू होती है। जब हरिंदर सिंह बरार को अपने पिता की मौत के बाद महज 3 साल की उम्र में महाराजा बनाया गया था। वह सियासत के आखिरी महाराज थे। बरार की शादी नरिंदर कौर से हुई, जिनसे उन्हें तीन बेटियां और एक बेटा हुआ। बेटियों के नाम अमृत कौर, दीपिंदर कौर और महीपिंदर कौर हैं। जबकि बेटे का नाम टिक्का हरमोहिंदर सिंह था। महाराज के बेटे की साल 1981 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। जिसके बाद वह डिप्रेशन में चले गए। इसके सात से आठ महीने बाद उनकी वसीयत को तैयार किया गया।

ट्रस्ट की जानकारी पत्नी और मां तक को नहीं

महाराज की संपत्ति की देखरेख करने के लिए एक ट्रस्ट बना। जिसकी जानकारी उनकी पत्नी और मां तक को नहीं थी। दीपिंदर कौर और महीपिंदर कौर को ट्रस्ट का चेयरपर्सन और वाइस चेयरपर्सन बनाया गया। वहीं वसीयत में लिखा है कि चूंकी महाराज की सबसे बड़ी बेटी अमृत कौर ने उनकी मर्जी के खिलाफ शादी की है, इसी वजह से उन्हें संपत्ति से बेदखल किया जाता है। वसीयत उस समय सामने आई, जब साल 1989 में महाराज की मौत हो गई थी। 

एक बेटी की भी हुई थी मौत

महाराज की बेटी महीपिंदर कौर की संदिग्ध परिस्थितियों में शिमला में मौत हो गई थी। वहीं अमृत कौर ने साल 1992 में स्थानीय अदालत में मामला दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि हिंदू जॉइंट फैमिली होने के कारण संपत्ति पर उनका भी अधिकार है। जबकि उनके पिता ने अपनी वसीयत में पूरी संपत्ति ट्रस्ट को दे दी थी। अमृत कौर ने वसीयत पर सवाल खड़े किए थे। 

महाराज की संपत्ति कहां-कहां हैं?

देश के आजाद होने के बाद महाराज को 20 हजार करोड़ रुपये की कीमत की संपत्ति दी गई, जिसमें चल और अचल संपत्ति शामिल है। इनके भवन और जमीनें पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में हैं। वहीं फरीदकोट में एक राजमहल है, जो 14 एकड़ में फैला हुआ है। इसे साल 1885 में बनवाया गया था। इसके एक हिस्से में अब 150 बेड का चैरिटेबल अस्पताल चल रहा है। इसके अलावा फरीदकोट में किला मुबारक है, जो 1775 में बना था। इसे राजा हमीर सिंह ने बनवाया था, जो 10 एकड़ में फैला हुआ है। वहीं अभी बची इमारत को साल 1890 में बनवाया गया था।  

महाराज की संपत्ति में नई दिल्ली का फरीदकोट हाउस है। यहां कॉपरनिकस मार्ग पर स्थित जमीन का बड़ा टुकड़ा केंद्र सरकार ने किराए पर लिया हुआ है। जिसका हर महीने का किराया 17 लाख रुपये है। वहीं इसकी कीमत की बात करें, तो वह 9 साल पहले करीब 1200 करोड़ रुपये थी। इसके साथ ही इनका चंडीगढ़ में मणीमाजरा किला और शिमला में फरीदकोट हाउस है। संपत्ति में 1920 मॉडल की रोल्स रॉयस, 1929 मॉडल की ग्राहम, 1940 मॉडल की बेंडली, जैगुआर, डामलर, पैकार्ड शामिल हैं, जो अभी चलने की स्थिति में हैं। महाराज की संपत्ति में एक हजार करोड़ रुपये के हीरे जवाहरात भी हैं, जिन्हें मुंबई के स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के पास सुरक्षित रखा गया है।  

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