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किर्गिस्तान में फंसे पीलीभीत के 12 मजदूर, टॉर्चर से परेशान होकर लगाई मदद की गुहार, हरकत में आया प्रशासन

किर्गिस्तान में फंसे हुए लोगों के परिवारों ने आरोप लगाया है कि विदेश में उन्हें टॉर्चर किया जा रहा है और लोकल एजेंट उनकी वापसी के लिए 2 लाख रुपये तक मांग रहे हैं।

Edited By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
Published : Dec 06, 2025 10:37 am IST, Updated : Dec 06, 2025 10:37 am IST
Labour- India TV Hindi
Image Source : PTI मजदूर

पीलीभीत (उप्र): पीलीभीत ज़िला प्रशासन ने ज़िले के 12 मज़दूरों के किर्गिस्तान में फंसे होने के मामले में उत्तर प्रदेश के गृह विभाग को एक डिटेल्ड रिपोर्ट भेजी है। ये मज़दूर वहां पर उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। पीलीभीत के जिलाधिकारी (डीएम) ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि गृह विभाग द्वारा तथ्यात्मक जानकारी मांगने और पुलिस अधीक्षक(एसपी) को जांच करने का निर्देश देने के बाद रिपोर्ट तैयार की गई। DM ने बताया, "किर्गिस्तान में फंसे सभी 12 लोगों की जानकारी इकट्ठा करके सरकार को भेज दी गई है ताकि उनकी सुरक्षित वापसी के लिए सही प्रक्रिया शुरू किया जा सके।"

टॉर्चर से परेशान हुए मजदूर

किर्गिस्तान में फंसे हुए लोगों के परिवारों ने आरोप लगाया है कि विदेश में उन्हें टॉर्चर किया जा रहा है और लोकल एजेंट उनकी वापसी के लिए 2 लाख रुपये तक मांग रहे हैं। मज़दूर अपने परिवारों को वीडियो मैसेज भी भेज रहे हैं, जिसमें बचाव की अपील की गई है।

फंसे हुए लोगों के परिजन लगातार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में कई परिवारों के सदस्यों ने जिलाधिकारी सिंह और जिले के एसपी अभिषेक यादव से मुलाकात की और अपनी आपबीती सुनाई।

पीड़ितों के परिजनों ने बताया कि रवि कुमार, अजय, चंद्रपाल, संतराम, रोहित, रमेश, हरस्वरूप, श्यामचरण, संजीव, प्रेमपाल, रामआसरे और हरिशंकर नाम के इन मजदूरों को करीब 3 महीने पहले एक स्थानीय भर्ती एजेंसी चलाने वाले एजेंटों ने किर्गिस्तान भेजा था। परिजनों का दावा कि हर मजदूर से लगभग 2.5 लाख रुपये लिए गए और उन्हें भ्रामक अनुबंधों के साथ 59 दिनों के वीजा पर भेजा गया। 

जानवरों से भी बदतर व्यवहार का आरोप

मजदूरों के परिजनों ने आरोप लगाया कि युवकों को अलग-अलग शहरों में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, उन्हें सही भोजन नहीं दिया जा रहा है और वापस लौटने से रोका जा रहा है। उन्होंने एजेंटों पर मजदूरों को छोड़ने के लिए दो से पांच लाख रुपये तक की मांग करने का भी आरोप लगाया और दावा किया कि युवकों को पीटा जा रहा है और उनके साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया जा रहा है।

जिले के एसपी अभिषेक यादव ने पुष्टि की कि मामले की जांच नगर के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) दीपक चतुर्वेदी को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि परिजनों ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पीलीभीत की एक कॉलोनी में संचालित एक स्थानीय कंपनी और उसके प्रतिनिधियों ने झूठे वादों के तहत युवकों को विदेश भेजने में भूमिका निभाई। पीलीभीत के जिलधिकार (DM) ने बताया कि प्रशासन की रिपोर्ट से राज्य सरकार को उनकी वापसी के लिए कदम उठाने में मदद मिलेगी। (इनपुट-पीटीआई)

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