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शिवसेना को समर्थन देने के मुद्दे पर कांग्रेस पशोपेश में, शरद पवार से फिर होगी चर्चा

 Reported By: Bhasha
 Published : Nov 11, 2019 11:59 pm IST,  Updated : Nov 11, 2019 11:59 pm IST

सूत्रों ने बताया कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने फोन पर कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से बातचीत कर उनकी पार्टी का समर्थन मांगा। हालांकि इसे लेकर सोनिया ने कोई वचन नहीं दिया। 

Congress- India TV Hindi
Senior Congress leader Mallikarjun Kharge along with former CM Prithviraj Chavan and other leaders comes out after a meeting with the party President Sonia Gandhi at 10 Janpath Image Source : PTI

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व में सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर सोमवार को विचार मंथन का काफी लंबा दौर चला और पार्टी की शीर्ष निर्णायक इकाई कांग्रेस कार्य समिति की भी बैठक हुई। किंतु इसके बावजूद पार्टी में इस मुद्दे पर असमंजस की स्थिति कायम रही। कई घंटों के विचार मंथन के बाद पार्टी ने तय किया कि इस मुद्दे पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ और विचार विमर्श किया जाएगा। साथ ही कांग्रेस ने सरकार में शामिल होने के अपने विकल्प खुले रखे हैं।

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के शीर्ष नेता मंगलवार को सुबह दस बजे सोनिया के निवास पर बैठक कर इस मुद्दे पर फिर विचार विमर्श करेंगे। इस बीच, महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सरकार बनाने के मामले में शिवसेना को समर्थन जुटाने के लिए दी गयी शाम साढ़े सात बजे तक की समयसीमा को आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया। राज्यपाल ने अब राकांपा को इसके लिए अगले 24 घंटे का समय दिया है।

इस बीच कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल द्वारा जारी एक बयान में भी बताया गया, ‘‘महाराष्ट्र में सरकार के गठन के मामले में सोमवार को सुबह कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक हुयी। बैठक से पूर्व पार्टी की प्रदेश इकाई के नेताओं के साथ विचार विमर्श किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने शरद पवार से भी बात की है। पार्टी इस विषय पर राकांपा के साथ अभी और बातचीत करेगी।’’

सूत्रों ने बताया कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने फोन पर कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से बातचीत कर उनकी पार्टी का समर्थन मांगा। हालांकि इसे लेकर सोनिया ने कोई वचन नहीं दिया। वेणुगोपाल ने पीटीआई भाषा को बताया, ‘‘सरकार गठन को लेकर शिवसेना को कोई समर्थन पत्र नहीं सौंपा गया है। कांग्रेस ने सरकार गठन को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं किया है।’’

ठाकरे और सोनिया के बीच हुई टेलीफोन वार्ता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह शिष्टाचार वश की गयी बातचीत थी। उन्होंने कहा कि सरकार गठन को लेकर कोई वचन नहीं दिया गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने महाराष्ट्र में शिवसेना को सरकार बनाने के लिये समर्थन देने के मुद्दे पर देर शाम पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की।

बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि मंगलवार को इस बारे में राकांपा नेताओं के साथ मुंबई में विस्तृत विचार विमर्श के बाद कोई फैसला किया जायेगा। सूत्रों के अनुसार पार्टी में एक वर्ग शिवसेना के नेतृत्व में सरकार को समर्थन देने के पक्ष में नहीं क्योंकि विचारधारा के मामले में दोनों धुर विरोधी राजनीतिक दल हैं। इस वर्ग का मानना है कि समर्थन देने से कांग्रेस की चुनावी संभावनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं क्योंकि शिवसेना धुर दक्षिणपंथी पार्टी है।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में सरकार के गठन के लिए शिवसेना को समर्थन देना है या नहीं, इस संबंध में फैसला करने के लिए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण और सुशील कुमार शिंदे के साथ-साथ पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख बालासाहेब थोराट ने सोनिया गांधी से मुलाकात की।

इधर, कांग्रेस का समर्थन मिलने के प्रति आश्वस्त शिवसेना ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के समक्ष मुंबई में शाम को सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। राज्यपाल ने शिवसेना को शाम साढ़े सात बजे तक सरकार के गठन का समय दिया लेकिन इस समय सीमा में कांग्रेस के समर्थन का पत्र नहीं मिलने के कारण शिवसेना ने राज्यपाल से दो दिन का समय मांगा। राज्यपाल ने इसे अस्वीकार कर दिया और राकांपा को सरकार बनाने का अवसर देते हुये एक दिन का समय दिया है।

सोनिया गांधी के आवास पर हुई बैठक में हालांकि, कोई फैसला नहीं हो सका था और पार्टी नेतृत्व ने शाम चार बजे फिर से बैठक करने का निर्णय लिया था। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता ए के एंटनी, अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और के सी वेणुगोपाल ने भाग लिया। सूत्रों ने बताया कि सोनिया गांधी ने महाराष्ट्र से पार्टी के वरिष्ठ नेता नाना पटोले से भी बात की और राजनीतिक संभावनाओं पर उनसे विचार-विमर्श किया।

पटोले ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और व्यापक चर्चा के बाद ही सभी निर्णय लिये जाते हैं। शिवसेना महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय सदन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है जिसके 56 विधायक हैं। भाजपा के 105 विधायक हैं। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के क्रमश: 44 और 54 विधायक है।

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