प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की कैबिनेट बैठक खत्म हो चुकी है। साथ ही 72 मंत्रियों के नामों पर मुहर लग चुकी है। इस बीच अलग-अलग मंत्रालयों की जिम्मेदारी अलग-अलग मंत्रियों को दी गई है। नितन गडकरी को एक बार फिर सड़क परिवहन मंत्रालय दिया गया है। प्रधानमंत्री के लिए अपने तीसरे कार्यकाल के 30 कैबिनेट मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार मंत्री और 36 राज्यमंत्री शामिल बनाए हैं। 43 मंत्री ऐसे हैं जो कम से कम तीन बार सांसद रह चुके हैं। 39 मंत्री ऐसे हैं जो मोदी सरकार में पहले भी काम कर चुके हैं। 6 मंत्री ऐसे हैं जो मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
गिरिराज सिंह- कपड़ा मंत्रालय
प्रह्लाद जोशी- खाद्य, कंज्यूमर अफेयर और रिन्यूएबल इनर्जी
सुरेश गोपी- पर्यटन एंव संस्कृति राज्य मंत्री
प्रह्लाद जोशी- कंज्यूमर अफेयर्स मंत्री
अमित शाह - गृह मंत्रालय
मनसुख मंडाविया- युवा मामले और लेबर मंत्रालय
अर्जुनराम मेघवाल- क़ानून मंत्री
जयंत चौधरी- स्किल डेवलपमेंट और एट्रानप्योरशिप मंत्रालय (राज्य)
निमूबेन जयंतीभाई बंभानियां- कंज्यूम्र अफेयर्स, फूड और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन मंत्रालय
नित्यानंद राय- गृह राज्य मंत्रालय
अनुप्रिया पटेल- परिवार कल्याण मंत्रालय (राज्य) और केमिकल्स और फर्टिलाइजर्स मंत्रालय
मनोहर लाल खट्टर- शहरी विकास मंत्रालय और उर्जा मंत्रालय
मनोहर लाल खट्टर- शहरी विकास मंत्रालय और उर्जा मंत्रालय
तोखन साहू- शहरी विकास राज्य मंत्री
नितिन गडकरी को मिला सड़क एवं परिवहन मंत्रालय।
हर्ष मल्होत्रा को मिला परिवहन राज्य मंत्रालय।
अजय टम्टा को बनाया गया परिवहन राज्य मंत्री।
मोदी 3.0 की कैबिनेट बैठक खत्म हो चुकी है और 7 लोक कल्याण मार्ग से सभी मंत्री जा चुके हैं।
मोदी 3.0 की पहली कैबिनेट में अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, ललन सिंह, शिवराज सिंह चौहान, जेपी नड्डा, पीयूष गोयल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, नितिन गडकरी शामिल हैं।
नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद अब कैबिनेट की बैठक शुरू हो गई है। अब कुछ ही मिनटों में मंत्रिमंडल के बंटवारे की जानकारी सामने आ जाएगी।
पीएम मोदी ने अधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, "देशभर के अपने किसान भाई-बहनों का जीवन आसान बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद पहला काम उनके लिए ही करने का अवसर मिला है। इसके तहत पीएम किसान सम्मान निधि की 17वीं किस्त से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर किया, जिसका लाभ देश के मेरे 9 करोड़ से ज्यादा अन्नदाताओं को होगा। आने वाले समय में हम किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के उत्थान के लिए निरंतर काम करते रहेंगे।"
अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर सुरेश गोपी ने लिखा, कुछ मीडिया प्लैटफॉर्म पर गलत खबरें फैलाई जा रही हैं कि मैं मोदी सरकार के मंत्री परिषद से इस्तीफा देने जा रहा हूं। यह सरासर गलत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम केरल के विकास और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पीएम मोदी ने अब तक अपने मंत्रियों के मंत्रालय नहीं तय किया है, लेकिन अपना काम शुरू कर चुके हैं। अपने तीसरे कार्यकाल में उन्होंने सबसे पहले किसान सम्मान निधि की फाइल को मंजूरी दी और किसानों के खाते में पैसे भेजे गए।
2014 में नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे। उस समय उनकी कैबिनेट में उन्हें मिलाकर 46 मंत्री थे। इसमें 24 कैबिनेट मंत्री, 10 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 12 राज्य मंत्री शामिल थे।
पीएम मोदी ने अपनी मौजूदा कैबिनेट में 72 मंत्रियों को शामिल किया है, लेकिन उनकी यह कैबिनेट सबसे बड़ी नहीं है। 2019 से 2024 के बीच कार्यकाल में पीएम मोदी की कैबिनेट में 78 मंत्री थे। 2021 में उनके मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था। इसके बाद कुल मंत्रियों की संख्या 78 पहुंच गई थी।
नरेंद्र मोदी कैबिनेट के मंत्री की शपथ लेने के बाद बीजेपी नेता बीएल वर्मा ने कहा कि उनकी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में ले जाएगी। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ चुके हैं। हमारा लक्ष्य विकसित भारत के सपने को पूरा करना है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरे परिवार के साथ पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ मुलाकात की। आज शाम को कैबिनेट मंत्रियों की बैठक होनी है। इसके बाद शिवराज के मंत्रालय का खुलासा हो जाएगा। सियासी जानकार कयास लगा रहे हैं कि शिवराज को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को 22 जून को संबोधित करेंगी। देश की नई संसद में दोनों सदनों के सांसद आसानी से एक साथ बैठ सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली एनडीए सरकार का पहला संसद सत्र 18 या 19 जून से शुरू हो सकता है। देश की 18वीं संसद में विपक्ष काफी मजबूत है और संसद सत्र के दौरान इसका असर देखने को मिलेगा। इससे पहले 17वीं और 16वीं संसद में विपक्ष कमजोर होने के कारण बिल आसानी से पास हो जाते थे, लेकिन अब हर विषय पर तीखी बहस होना तय है।
पीएम मोदी ने अपने कैबिनेट में जिन पुराने मंत्रियों को जगह दी है, उनके मंत्रालय में फेरबदल की संभावना बेहद कम है। विदेश मंत्री का पद एक बार फिर एस जयशंकर को मिल सकता है। मंत्रालय के बंटवारे से पहले ही जयशंकर ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री और श्रीलंका के राष्ट्रपति से मुलाकात की।
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