हेल्थ डेस्क: आज के समय में हर कोई अपने लक्ष्य को पहले से ही निर्ण ले लेता है, लेकिन कई बार ऐसा हो जाता है कि हमें समझ नहीं आता है कि आगे चलकर हमें क्या करना है। कई बार हमें 2 रास्ते नजर आते है कि अपने करियर बनाने के लिए हमें इनमें से चुनना है लेकिन हम निर्णय नहीं ले पाते है। हाल में ही हुए एक स्टडी के अनुसार जो लोग लक्ष्य को निर्धारित नहीं कर पाते है। उन्हें डिप्रेशन की समस्या हो जाती है।
ऐसे लोग जो अपने लक्ष्य हासिल करने को लेकर निश्चित नहीं हैं, इस तरह के लोगों में मनोवैज्ञानिक संकट का सामना करने का खतरा ज्यादा हो सकता है। इस शोध का अध्ययन पत्रिका 'पर्सनाल्टी एंड इंडिविजुअल डिफरेंसेज' में प्रकाशित किया गया है। इसमें प्रेरक संघर्ष के दो रूपों की जांच की गई है।
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इसमें अंतर-लक्ष्य संघर्ष--जब एक लक्ष्य का पीछा करने वाला व्यक्ति इसके कठिन होने पर दूसरे का पीछा करता है और दोतरफा विचार की वजह से इसमें किसी खास लक्ष्य को लेकर द्वंद्व का एहसास होने लगता है।
इसके परिणाम से पता चलता है कि इन सभी प्रकार के लक्ष्य संघर्ष स्वतंत्र रूप से चिंता व अवसाद के लक्षणों से जुड़े हैं।
ऑस्ट्रेलिया के इडिथ कोवान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन डिक्शन ने कहा, "हम जानते हैं कि लक्ष्य का पीछा करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है जो जीवन को अर्थ व उद्देश्य व बेहतरी को बढ़ावा देता है।"
हालांकि, डिक्शन ने कहा, "जब ये लक्ष्य संघर्ष पैदा करते हैं तो यह मनोवैज्ञानिक संकट पैदा करते हैं।"
ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय के निक मोबर्ली ने कहा, "कमजोर मानसिक स्वास्थ्य वाले लोगों में ऐसा देखा गया है कि उनके निजी लक्ष्य दूसरे लक्ष्यों में बाधा बनने लगते हैं।"