वृंदावन की यात्रा की योजना बनाते समय ज़्यादातर लोग बांके बिहारी मंदिर और प्रेम मंदिर को अपनी बकेट लिस्ट में शामिल करते हैं। इन दोनों जगहों के बिना वृंदावन की यात्रा अधूरी मानी जाती है। जहां, बांके बिहारी मंदिर भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए प्रसिद्ध है। वहीं, प्रेम मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। लेकिन, अगर आप यहाँ के रंग, रास और रूह को महसूस करना चाहते हैं तो यहां के इन दोनों मंदिरों से भी आगे बढ़िए। यहां की हर गली में कान्हा की लीला और हर मोड़ पर भक्ति की महक बसती है। तो, अगर आ वृंदावन जा रहे हैं तो इन दोनों जगहों के अलावा इन कुछ खूबसूरत और प्रसिद्ध जगहों की सैर भी ज़रूर करें।
वृंदावन के इन प्रसिद्ध जगहों की ज़रूर करें सैर:
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इस्कॉन वृन्दावन: वृंदावन में स्थित इस्कॉन मंदिर बेहद मशहूर और खूबसूरत है। इस मंदिर को श्री कृष्ण बलराम मंदिर भी कहा जाता है। यह भारत का पहला इस्कॉन मंदिर था जिसे 1975 में बनाया गया था। इसलिए यह दुनिया के प्रमुख इस्कॉन मंदिरों में से एक है।
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राधा रमन मंदिर: राधा रमन मंदिर, वृंदावन के सात प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह मंदिर श्री कृष्ण को समर्पित है, जिनकी पूजा राधा रमन के रूप में की जाती है। इस मंदिर में हर दिन हज़ारों भक्त अपने प्रिय भगवान के दर्शन के लिए आते हैं।
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निधिवन: निधिवन वृंदावन में स्थित एक पवित्र स्थल और मंदिर है। यह स्थल भगवान कृष्ण और राधा की रास लीला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ तुलसी के पेड़ जोड़े में हैं, जिनमें से एक को कृष्ण और दुसरे को गोपी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण रात में यहां गोपियों संग रास लीला करते हैं। इसलिए, इस स्थान पर रात में किसी को जाने की अनुमति नहीं है।
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केशी घाट: केशी घाट वृंदावन के पास, यमुना नदी की तट पर एक पवित्र घाट है। यह घाट अपनी सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर दिन शाम को यमुना आरती होती है और नाव की सवारी का आनंद लिया जा सकता है।
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रंगजी मंदिर: वृंदावन, में स्थित रंगजी मंदिर को रंगनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार, भगवान रंगनाथ को समर्पित है। इस मंदिर की एक खास बात यह है कि यह मंदिर मद्रास के रंगनाथ मंदिर की शैली के अनुसार बनाया गया है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)