वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर की लोकप्रियता दिन ब दिन देश में बढ़ती जा रही है। साल भर बड़ी संख्या में यहां श्रद्धालु आते हैं। बता दें, यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है, जो राधा और कृष्ण का संयुक्त रूप माने जाते हैं, और उनकी मूर्ति 'त्रिभंग मुद्रा' में स्थापित है। किसी ख़ास उत्सव पर ही नहीं बल्कि हर दिन यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु दूर-दूर से केवल बिहारी जी के दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बांके बिहारी मंदिर के पट कब खुलते और कब बंद होते हैं? आइए जानते हैं।
पट खुलने का क्या मतलब है?
बांके बिहारी मंदिर में पट खुलते का मतलब है कि भक्त अब भगवान के दर्शन कर सकते हैं। बांके बिहारी मंदिर में यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। भगवान का यह दर्शन केवल कुछ समय के लिए होता है। क्यंकि पटों को बार-बार खोला और बंद किया जाता है ताकि भगवान का सम्मोहन टूट सके। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि अगर भक्तों की नज़रें लगातार भगवान पर पड़ीं तो वे उनके साथ चले जाएंगे, इसलिए पर्दा जल्दी-जल्दी डाला जाता है।
कितने बजे खुलता है मंदिर?
बांके बिहारी मंदिर सर्दियों के मौसम में सुबह 8:45 बजे से शुरू होता है और दोपहर 12 बजे तक बंद होता है। शाम को 4:30 बजे से लेकर रात 8:30 बजे तक खुला रहता हैं। वहीं, गर्मियों में, सुबह के दर्शन सुबह 7:45 से शुरू होते हैं, जबकि दोपहर में 12:00 बजे तक बंद हो जाते हैं और शाम को 4:15 बजे से खुलता है और रात 8:30 बजे तक बंद हो जाता हैं।
मंदिर के पट इन निर्धारित समयों पर ही खुलते और बंद होते हैं। बिहारी जी के दर्शन के दौरान "मंगल आरती" केवल साल में एक बार, जन्माष्टमी की सुबह ही होती है। सामान्य दिनों में बिहारी जी को अचानक परदे के पीछे कर दिया जाता है, ताकि भक्त भगवान के दर्शन अधिक देर तक न कर सकें। यह इस मंदिर की खास परंपरा है। इसलिए यदि आप बांके बिहारी मंदिर जा रहे हैं, तो समय का ध्यान ज़रूर रखें और श्रद्धा के साथ बिहारी जी के दर्शन करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)