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महाराष्ट्र में पहली कक्षा से हिंदी पढ़ाने का विरोध, अजित पवार बोले- पांचवीं से शुरू हो पढ़ाई

 Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jun 25, 2025 04:24 pm IST,  Updated : Jun 25, 2025 04:24 pm IST

महाराष्ट्र में पहली कक्षा से हिंदी पढ़ाने के आदेश का उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने विरोध किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि हिंदी की पढ़ाई पांचवीं से शुरू होनी चाहिए और प्राथमिक स्तर पर मराठी पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार। Image Source : PTI

पुणे: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने राज्य के स्कूलों में हिंदी पढ़ाए जाने को लेकर बड़ा बयान दिया है। पवार ने सूबे में पहली कक्षा से तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ाने के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र में जारी बवाल के बीच सुझाव दिया कि हिंदी की पढ़ाई पांचवीं कक्षा से शुरू की जानी चाहिए। पवार ने यह भी जोर दिया कि बच्चों को पहली कक्षा से मराठी भाषा सीखने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि वे इसे अच्छी तरह पढ़ और लिख सकें।

‘कोई भी किसी खास भाषा को पढ़ाने के खिलाफ नहीं’

मंगलवार को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पवार ने कहा, ‘मुख्यमंत्री ने सोमवार को इस मुद्दे पर एक बैठक बुलाई। मेरा मानना है कि हिंदी को पहली कक्षा से चौथी कक्षा तक शुरू नहीं किया जाना चाहिए। इसे पांचवीं कक्षा से शुरू किया जाना चाहिए। छात्रों को पहली कक्षा से मराठी सीखनी चाहिए और इसे धाराप्रवाह पढ़ने और लिखने में सक्षम होना चाहिए।’ पवार ने यह भी कहा कि कोई भी किसी खास भाषा को पढ़ाने के खिलाफ नहीं है, लेकिन छोटी उम्र में बच्चों पर अतिरिक्त भाषा का बोझ डालना ठीक नहीं है।

सरकारी आदेश के बाद शुरू हुआ था विवाद

पिछले हफ्ते महाराष्ट्र सरकार ने एक संशोधित आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों को सामान्य तौर पर हिंदी तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जाएगी। इस आदेश के बाद विवाद शुरू हो गया। सरकार ने बाद में स्पष्ट किया कि हिंदी पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि, अगर कोई स्कूल हिंदी के अलावा दूसरी भाषा पढ़ाना चाहता है, तो प्रत्येक कक्षा में कम से कम 20 छात्रों की सहमति जरूरी होगी। हिंदी पढ़ाने को लेकर शुरू हुए इस विवाद ने महाराष्ट्र में नई बहस छेड़ दी है।

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