महाराष्ट्र में हाल ही में हुए महानगरपालिका चुनाव में भाजपा और शिवसेना को बड़ी जीत हासिल हुई है। मुंबई में BMC चुनाव में भी भाजपा-शिवसेना के गठबंधन ने जीत हासिल कर ली है। हालांकि, बीएमसी का मेयर कौन होगा, ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है। इस बीच शिवसेना ने अपने 29 पार्षदों को मुंबई के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने अपने पार्षदों से मुलाकात भी की है। मुंबई के मेयर को लेकर मंथन तेज है और इस बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना ने 1 साल के लिए बीएमसी के मेयर पद की मांग की है।
क्या है शिवसेना की डिमांड?
सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना चाहती हैं की मुंबई का मेयर पद पहले एक साल के लिए उनको दिया जाए। शिवसेना की दलील है, 23 जनवरी को बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी है। ऐसे में बाला साहेब को ट्रिब्यूट के तौर पर मुंबई का मेयर पद पहले साल के लिए शिवसेना को दिया जाए। इसके पहले शिवसेना ढ़ाई-ढ़ाई साल के मेयर पद की मांग कर रही थी लेकिन जब उन्हें यह एहसास हुआ कि इस मांग को पूरा नहीं किया जाएगा तब उन्होंने ये नई मांग रखी है।
गठबंधन धर्म का वास्ता
जानकारी के मुताबिक, शिवसेना दलील दे रही है की केंद्र और राज्य में मुश्किल वक्त में हमेशा शिवसेना ने बीजेपी का साथ दिया। ऐसे में जब इस वर्ष बाल ठाकरे के जन्म को 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं तो गठबंधन धर्म के नाते पहले वर्ष शिवसेना का मेयर बने और बचे हुए 4 वर्ष मेयर पद बीजेपी के पास रहें।
भाजपा ने भी पार्षदों को दिया बड़ा आदेश
इस बीच मुंबई बीजेपी ने भी अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को बड़ा आदेश देते हुए उन्हें कहा है कि अगले 10 दिन मुंबई के बाहर मत जाओ। अगर किसी आपात स्थिती की वजह से शहर के बाहर जाना जरूरी हो तो पहले इसकी सूचना पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी जाए। इस आदेश के पीछे वजह है मेयर पद का चुनाव.. दरअसल, नए मेयर के चुनाव में करीब 8-10 दिन लग सकतें हैं। बीजेपी के पास 89 और शिवसेना के पास 29 पार्षद है। मेयर पद के लिए 114 पार्षदों की जरुरत है। महायुति के पास बहुमत से सिर्फ 4 वोट ज्यादा है इसलिए अहतियात बरतते हुए बीजेपी मेयर का चुनाव होने तक सभी पार्षदों को मुंबई में ही रखना चाहती है।
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