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बिना 1 रुपया दिए कैसे हुआ जमीन का सौदा? पढ़ें पुणे जमीन घोटाले की जांच में अबतक क्या-क्या मिला?

पुणे में जमीन घोटाले की जांच, महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में मुद्दा बनी हुई है। इस खबर में पढ़िए कि पुलिस की जांच में लैंड डील के कौन-कौन के तथ्य सामने आए हैं।

Written By : Dinesh Mourya Edited By : Vinay Trivedi Published : Nov 09, 2025 11:32 am IST, Updated : Nov 09, 2025 11:32 am IST
pune land deal- India TV Hindi
Image Source : PTI पुणे जमीन घोटाले की जांच के घेरे में कौन-कौन है?

पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति में पुणे जमीन घोटाले की चर्चा तेज है। इस बीच, पुणे जमीन घोटाले की पुलिस जांच में सामने आया है कि अमेडिया कंपनी और शीतल तेजवानी में हुए जमीन के सौदे के बाद आरोपी तहसीलदार सूर्यकांत येवले ने इस साल जून महीने में Botanical Survey of India को नोटिस जारी करके जमीन खाली करने का आदेश दिया था। मुंधवा की 40 एकड़ सरकारी जमीन फिलहाल Botanical Survey of India के पास लीज पर है।

तहसीलदार ने अपने नोटिस में क्या कहा था?

तहसीलदार ने अपने नोटिस में कहा था कि पावर ऑफ अटॉर्नी धारक शीतल तेजवानी ने यह जमीन अमेडिया कंपनी को बेच दिया है। ऐसे में अमेडिया एलएलपी इस जमीन का फिजिकल पजेशन चाहती है, इसीलिए इस जमीन को खाली किया जाए।

कैसे शुरू हुई घोटाले की जांच?

तहसीलदार का नोटिस मिलने के बाद Botanical Survey of India ने इसकी शिकायत पुणे कलेक्टर कार्यालय से की। फिर मामले की गंभीरता को देखते हुए तब कलेक्टर ने Botanical Survey of India से कहा कि उन्हें जमीन खाली करने की जरूरत नहीं है, एसडीएम इस मामले की जांच करेंगे।

कितने रुपये में हुआ जमीन का सौदा?

तभी से इस केस के आरोप में तहसीलदार सूर्यकांत येवले की जांच चल रही थी। पुलिस जांच में ये भी पता चला है कि भले ही आरोपी शीतल तेजवानी और अमेडिया कंपनी के बीच 300 करोड़ रुपये में इस जमीन का सौदा हुआ था लेकिन असल में अमेडिया कंपनी की तरफ से एक रुपया भी शीतल तेजवानी को नहीं दिया गया था।

पार्थ पवार से क्या है कनेक्शन?

गौरतलब है कि पुणे के पॉश इलाके मुंधवा में 40 एकड़ जमीन की बिक्री 300 करोड़ रुपये में की गई थी। ये जमीन डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेची गई थी। आरोप है कि ये जमीन सरकारी है और इस सौदे में जरूरी स्टांप ड्यूटी भी माफ कर दी गई थी। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि इस जमीन की वास्तविक कीमत 1,800 करोड़ रुपये है। लेकिन उसे महज 300 करोड़ में बेच दिया गया।

हालांकि, अजित पवार इस मामले की सफाई दे चुके हैं। उन्होंने सौदे के रद्द होने की जानकारी दी थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पार्थ पवार को ये बात मालूम नहीं थी कि वह जमीन सरकार की है।

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