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महायुति के 68 उम्मीदवार वोटिंग से पहले जीते तो ठनका चुनाव आयोग का माथा, बना दिया नया नियम

Reported By : Dinesh Mourya Edited By : Shakti Singh Published : Jan 03, 2026 10:23 pm IST, Updated : Jan 03, 2026 10:23 pm IST

महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में महायुति के 68 उम्मीदवार मतदान से पहले ही जीत चुके हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने इन मामलों की जांच के आदेश दिए हैं और भविष्य में ऐसा होने पर रिपोर्ट देने का नियम बनाया है।

Eknath Shinde Devendra Fadnavish- India TV Hindi
Image Source : PTI चुनाव प्रचार के दौरान महायुति के नेता एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर उम्मीदवारों के निर्विरोध चुनाव जीतने पर चुनाव आयोग ने नया नियम बना दिया है। अब किसी भी चुनाव में किसी भी उम्मीदवार के निर्विरोध जीतने पर पूरी रिपोर्ट राज्य चुनाव आयोग को दी जाएगी। निर्विरोध चुनाव विवाद पर आदेश जारी करते हुए राज्य चुनाव आयोग ने कहा कि निकाय चुनाव में दबाव के कारण नाम वापस लेने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए भविष्य में ऐसा होने पर स्थानीय अधिकारियों के लिए रिपोर्ट सौंपना जरूरी होगा।

आयोग के अनुसार स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों के दौरान कई बार नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद केवल एक ही उम्मीदवार शेष रह जाता है, जिसके चलते उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। नामांकन प्रक्रिया के समय अनेक उम्मीदवार अपने-अपने नामांकन पत्र दाखिल करते हैं, लेकिन नामांकन वापसी के समय एक उम्मीदवार को छोड़कर शेष सभी अपने आवेदन वापस ले लेते हैं। ऐसी स्थिति में इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि संबंधित उम्मीदवार ने अन्य उम्मीदवारों पर दबाव डालकर उनके नामांकन वापस करवाए हों। इसे ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में यदि इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उससे संबंधित विस्तृत रिपोर्ट तत्काल राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाए।

चुनाव आयोग की अनुमति से तय होगा नतीजा

स्थानीय अधिकारियों की रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य चुनाव आयोग अनुमति देगा। इसके बाद ही एकमात्र उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाएगा। राज्य चुनाव आयोग ने इस आदेश की कॉपी राज्य के सभी महानगरपालिका आयुक्त और कलेक्टर को भेजी है। इसमें लिखा है, "लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट चुनावों के दौरान, अक्सर यह अनाउंस किया जाता है कि कोई कैंडिडेट बिना किसी विरोध के चुन लिया गया है, क्योंकि नॉमिनेशन वापस लेने की डेडलाइन के बाद सिर्फ एक कैंडिडेट बचता है। जब कई कैंडिडेट अपना नॉमिनेशन फाइल करते हैं, तो नाम वापस लेने के समय, एक को छोड़कर बाकी सभी कैंडिडेट अपना एप्लीकेशन वापस ले लेते हैं। ऐसे मामलों में, इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि बचे हुए कैंडिडेट ने दूसरे कैंडिडेट पर अपना नॉमिनेशन वापस लेने का दबाव डाला हो। इसलिए, अगर भविष्य में ऐसी घटनाएं होती हैं, तो तुरंत स्टेट इलेक्शन कमीशन को एक डिटेल्ड रिपोर्ट भेजी जानी चाहिए, और स्टेट इलेक्शन कमीशन से अप्रूवल मिलने के बाद ही कैंडिडेट को जीता हुआ घोषित किया जाना चाहिए।"

Election Commission Order

Image Source : REPORTER INPUT
महाराष्ट्र चुनाव आयोग का आदेश

महायुति के 68 उम्मीदवार निर्विरोध जीते

बीएमसी चुनाव में महायुति गठबंधन के 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इनमें भाजपा के 44, शिवसेना के 22 और अजित पवार की एनसीपी के दो उम्मीदवार शामिल हैं। सबसे ज्यादा निर्वाचित उम्मीदावारों की संख्या ठाणे जिले के कल्याण-डोंबिवली नगर निगम से है। इसके बाद पुणे, पिंपरी चिंचवाड़, पनवेल, भिवंडी, धुले, जलगांव और अहिल्यानगर हैं। इस बीच, शिवसेना (उबाठा) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने शुक्रवार को सत्ताधारी दल पर आरोप लगाया कि वह विपक्षी उम्मीदवारों को 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों से पीछे हटने के लिए पैसों का इस्तेमाल कर रही है और उन्हें धमकी दे रही हैं। महाराष्ट्र में 15 जनवरी को 29 नगर निकायों के चुनाव होंगे।

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