राजस्थान के भरतपुर जिले की रहने वाली एक 60 वर्षीय महिला की अस्पताल में मिलने वाली खांसी सिरप पीने से तबियत खराब हो गई। महिला को जिला आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। सेवर थाना क्षेत्र के गांव गुंडवा की रहने वाली 60 वर्षीय महिला रामदेई के पोते को लगभग 8-10 दिन पहले खांसी जुकाम होने पर शहर के सरकारी सेटेलाइट अस्पताल में दिखाने ले गए थे। बच्चे को खांसी की सिरप दी गई, जिसे पीने पर उसको चक्कर आने लगे। परिजनों ने सोचा कमजोरी की वजह से ऐसा हो रहा होगा। इसके बाद बच्चे को खांसी की सिरप नहीं पिलाई।
शुक्रवार रात को बुजुर्ग महिला को खांसी की शिकायत हुई तो उसने रात में यह खांसी की सिरप पी ली। सिरप पीने के लगभग दो घंटे बाद खुजली शुरू हो गई और सुबह से उल्टी-दस्त और चक्कर आने लगे। बुजुर्ग महिला के घर वालों ने महिला को जिला आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया है। महिला अपने साथ खांसी की सिरप भी लेकर अस्पताल पहुंची है। जहां महिला का इलाज जारी है।
बीमार बुजुर्ग महिला जब अस्पताल में भर्ती हुई थी तो अपने साथ अस्पताल से मिली खांसी के सिरप की दोनों बोतलों को भी साथ लेकर आई है, जिसका सेवन करने के बाद उसकी तबियत खराब हुई थी। यह वही (DEXTROMETHORPHAN HBr SIRUP IP 13.5 MG\5ML) सिरप है, जिससे बच्चों की मौत हो रही है और सिरप को फिलहाल सरकार ने बैन कर दिया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर गौरव कपूर ने बताया कि 25 सितंबर को बयाना के कलसाड़ा सीएचसी के प्रकरण के बाद सरकार ने सिरप वितरण पर रोक लगा दी थी। कुछ लोग 25 तारीख से पहले अस्पताल से सिरप लेकर आये और अब उसका उपयोग कर रहे है। बिना किसी चिकित्सक परामर्श के कोई भी दवाई नहीं ले। ऐसा ही प्रकरण देखने में आया है कि बुजुर्ग महिला ने अपने नाती की दवाई बिना चिकित्सक के परामर्श लिए पी ली और उन्हें दवाई रिएक्शन कर गई। डॉ.गौरव कपूर ने भरतपुर की जनता से अपील की है की बिना किसी चिकित्सक परामर्श के कोई भी दवा न लें।
(भरतपुर से कपिल चीमा की रिपोर्ट)
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