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अजमेर शरीफ दरगाह में अदा हुई बसंत की रस्म, दिया गया मोहब्बत का पैगाम

 Reported By: Shoaib Raza Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Jan 25, 2026 01:23 pm IST,  Updated : Jan 25, 2026 01:23 pm IST

अजमेर शरीफ स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में आज बसंत की परंपरागत रस्म अदा हुई। हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती साहब ने कहा कि पिछले 800 वर्षों से अजमेर शरीफ दरगाह इसी संदेश को आगे बढ़ाती आ रही है।

Ajmer Sharif Dargah- India TV Hindi
अजमेर शरीफ स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह Image Source : REPORTER INPUT

अजमेर: अजमेर शरीफ स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में आज बसंत की परंपरागत रस्म श्रद्धा और सम्मान के साथ अदा की गई। यह आयोजन हजरत सज्जादानशीन साहब के जानशीन (उत्तराधिकारी) हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती साहब की सदारत में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर दरगाह के निज़ाम गेट से दरगाह के मौरूसी क़व्वालों ने हाथों में बसंत का गड़बा लेकर बसंती कलाम पढ़ते हुए आस्तान-ए-शरीफ़ तक प्रस्थान किया। वहां हज़रत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती साहब ने ख़्वाजा साहब के मज़ार पर बसंत पेश की।

अनमोल परंपरा का जीवंत उदाहरण 

इस मौके पर अपने संबोधन में हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती साहब ने कहा कि आज अजमेर शरीफ दरगाह में अदा की गई बसंत की रस्म हमारे देश की उस अनमोल परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जहां विभिन्न धर्मों और मजहबों के लोग आपसी प्रेम, सम्मान और भाईचारे के साथ एक-दूसरे की परंपराओं को अपनाते और निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं, रीति-रिवाज़, संस्कृति और संस्कार सदियों से समाज को जोड़ने का कार्य करते आए हैं। ये परंपराएं हमें एक-दूसरे के धर्म, आस्था और विश्वास के प्रति सम्मान की भावना सिखाती हैं और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करती हैं।

हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि इन्हीं परंपराओं को हमारे सूफी संतों, बुज़ुर्गों और महान विभूतियों ने आगे बढ़ाया है, जिसका प्रमाण है कि आज भी बसंत जैसे उत्सव पूरे श्रद्धा और प्रेम के साथ दरगाहों पर मनाए जाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हिंदुस्तान एक ऐसी मजबूत और अनमोल माला है, जिसके धागे में विभिन्न धर्मों, सभ्यताओं और संस्कृतियों के मोती पिरोए हुए हैं, और यही विविधता भारत को विश्व में एक अद्वितीय पहचान और विशेष स्थान प्रदान करती है।

अपने वक्तव्य में उन्होंने यह भी कहा कि यह आयोजन उन लोगों के लिए एक स्पष्ट संदेश है, जो धर्म के नाम पर नफरत और विभाजन फैलाने की कोशिश करते हैं, जबकि सच्चा धर्म इंसान से मोहब्बत करना, समाज में अमन कायम रखना और दिलों को जोड़ना सिखाता है।

अंत में हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती साहब ने कहा कि पिछले 800 वर्षों से अजमेर शरीफ दरगाह इसी संदेश को आगे बढ़ाती आ रही है, सबको साथ लेकर चलने का, मोहब्बत का पैगाम देने का और नफरत की ताकतों को समाप्त करने का।

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