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Falgun Amavasya 2025: फाल्गुन अमावस्या के दिन करें पितृ स्तोत्र का पाठ, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति, पूर्वज बरसाएंगे आशीर्वाद

Pitra Stotra: फाल्गुन अमावस्या के दिन पितृ स्त्रोत का पाठ करने से पितरों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में अमावस्या के दिन स्नान-दान के साथ ही पितृ स्त्रोत का पाठ भी अवश्य करें।

Written By: Vineeta Mandal
Published : Feb 20, 2025 03:01 pm IST, Updated : Feb 20, 2025 03:01 pm IST
फाल्गुन अमावस्या 2025- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV फाल्गुन अमावस्या 2025

Falgun Amavasta 2025 Pitra Stotra: हिंदू धर्म में पूर्णिमा के साथ ही अमावस्या तिथि भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। अमावस्या के दिन स्नान-दान करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों पर कृपा बरसाते हैं। साथ ही अमावस्या के दिन पितृ स्त्रोत का पाठ करना भी फलदायी माना गया है। पितृ पितृ स्त्रोत का पाठ करने से घर में पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। तो फाल्गुन अमावस्या के दिन पितृ स्त्रोत का पाठ जरूर करें।  

फाल्गुन अमावस्या 2025 कब है? 

इस साल फाल्गुन अमावस्या 27 फरवरी 2025 को है। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 8 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि का समापन 28 फरवरी को सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। फाल्गुन अमावस्या के दिन स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05 बजकर 09 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। 

पितृ स्तोत्र

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्।

नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्॥
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान्॥

मन्वादीनां मुनीन्द्राणां सूर्याचन्द्रमसोस्तथा।
तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि॥

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:॥

देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान्।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येsहं कृताञ्जलि:॥

प्रजापते: कश्यपाय सोमाय वरुणाय च।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि:॥

नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे॥

सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम्॥

अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम्।
अग्नीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत:॥

ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण:॥

तेभ्योsखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतमानस:।
नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुज:॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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