सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व है, उसमें से सावन प्रदोष व्रत का अलग ही महत्व माना गया है। प्रदोष व्रत हर मास दो बार आता है, एक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर और दूसरा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर। इस दिन जातक शाम के समय में भी भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से और प्रदोष काल में पूजन करने से जातक के सभी दुख दूर होते हैं ऐसे में इस दिन शाम के समय में शिवलिंग पर एक पुष्प जरूर अर्पित करना चाहिए। इससे महादेव प्रसन्न होते हैं।
हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल सावन का अंतिम प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी 6 अगस्त के दिन दोपहर 02.08 बजे से आरंभ हो जाएगा, जो 7 अगस्त की दोपहर 02.27 बजे तक रहेगा। ऐसे में सावन का अंतिम प्रदोष व्रत 6 अगस्त को रखा जाएगा, जो बुधवार दिन की वजह से बुध प्रदोष व्रत कहा जा रहा है।
इस दिन प्रदोष काल की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 07.08 बजे से लेकर रात 09.16 बजे तक है।
इस दिन शाम के समय में शिव जी की पूजा का विशेष विधान है। शाम के समय शुभ मुहूर्त में शिव जी की पूजा की जानी चाहिए। इस दिन भगवान शिव की प्रिय चीजें जैसे गाय का दूध, गंगाजल, रुद्राक्ष, भस्म, अक्षत, बेलपत्र, भांग-धतूरा आदि चढ़ाना चाहिए। साथ ही पूजा के दौरान मृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए और आरती भी करें।
सावन के अंतिम प्रदोष दिन भगवान शिव को धतूरे का फूल जरूर अर्पित किया जाता है क्योंकि यह फूल उन्हें बहुत प्रिय है। साथ ही इसका फल भी जरूर चढ़ाना चाहिए। मान्यता है कि फूल चढ़ाने से जातक के पाप कट जाते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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