मैरी कॉम ने अपने मुक्कों के दम पर देश का नाम पूरी दुनिया में ऊंचा किया। उन्होंने ओलंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स हर जगह मेडल जीतकर तिरंगा लहराया। वह पहली भारतीय महिला मुक्केबाज हैं, जिन्होंने ओलंपिक में मेडल जीता था। अब 'आप की अदालत' में इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर इन चीफ रजत शर्मा के सामने उन्होंने बताया है कि उन्हें कार चलानी नहीं आती थी और पहली बार जब उन्होंने दिल्ली में कार चलाई, तो कैसे वह पुलिस स्टेशन पहुंच गईं।
मैरी कॉम ने सुनाया मजेदार किस्सा
मैरी कॉम ने कहा कि मणिपुर में मेरे पास दो-तीन कारे हैं, लेकिन मुझे चलानी नहीं आती थी। इसके बाद जब मैं दिल्ली में थी। जब ड्राइवर नहीं था, तो मैं खुद कार लेकर दिल्ली के ट्रैफिक में निकल पड़ीं। इसके बाद रेड लाइट होने की वजह से रुकीं। वहां एक आदमी ने पीछे से कार में ठोक दिया। वह आदमी मुझे ही कहने लगा कि मेरी गलती है। वह बार-बार इसी बात को दोहराए जा रहा था। इसी वजह से मैंने उसे एक मुक्का मारा, जबकि मेरी गलती नहीं थी। नाखून बड़े होने की वजह से उसके चेहरे से खून निकलने लगा। उसने ऐसी नौटंकी की, जैसे वह मर ही गया हो।
मैरी कॉम ने आगे कहा कि एक ट्रैफिक पुलिस वाला था। वह हमें पुलिस स्टेशन ले गया, जहां उस आदमी ने अपनी गलती मान ली और पुलिस वाले ने उसे कहा कि इन्होंने तुम्हें कम मारा है। पता है ये कौन है। इन्होंने देश का नाम ऊंचा किया है। ओलंपिक मेडल जीता है।
पढ़ाई में नहीं लगता था मन: मैरी कॉम
मैरी कॉम ने कहा पढ़ाई करने में मेरा मन नहीं लगता था, पढ़ने के समय मैं सो जाती थी। पिता कहते थे कि बॉक्सिंग में नहीं जाना, उसमें नाक तोड़कर खून निकाल देते हैं। चेहरा बिगड़ जाएगा तो शादी कैसे होगी। मैंने किसी की नहीं सुनी, मेरे माता पिता रोज कमाते थे और रोज उसी पैसे से खाना आता था। बहुत संघर्ष था लेकिन मैं तब भी खुश थी।
मैरी कॉम ने कहा कि आप जब तक मजबूत नहीं होंगे तब तक आप दुनिया में जगह नहीं बना सकते। मुझे हारना पसंद नहीं है। जब मेरी शादी हुई, बच्चे हुए लेकिन मैंने अपना ध्यान लक्ष्य पर बनाए रखा कि मुझे गोल्ड मेडल जीतना है और मैंने जीता। मैं जो ठान लेती हूं उसे पूरा करती हूं।
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