बसंतर के युद्ध को भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे भीषण टैंक लड़ाइयों में से एक माना जाता है। इस युद्ध के दौरान अरुण खेत्रपाल ने अपने अदम्य साहस और बलिदान से युद्ध का रुख बदल दिया था।
कारगिल के युद्ध में राइफलमैन संजय कुमार ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए प्वाइंट 4875 को दुश्मनों के चंगुल से छुड़ाया था। उनके इस साहस के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया और उन्हें प्रमोट करके सूबेदार मेजर बना दिया गया।
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ममता बनर्जी ने केंद्र पर महान स्वतंत्रता सेनानी द्वारा परिकल्पित योजना आयोग को खत्म करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने द्वीपों का नाम शाहिद और स्वराज द्वीप रखा था, जब उन्होंने 1943 में द्वीपसमूह का दौरा किया था लेकिन अब इसका नाम बदला जा रहा है।
आज से 20 साल पहले भारतीय सेना के एक युवा अधिकारी ने बहादुरी की वह दास्तान लिखी थी, जिसे याद करके आज भी हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से भारतीय सेना में भर्ती हुए राइफलमैन (अब सूबेदार) संजय कुमार ने कारगिल की लड़ाई के दौरान संजय कुमार ने जिस साहस और बहादुरी से दुश्मन का खात्मा किया उसकी मिसाल दी जाती है
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