दुबईः साल 1986 से चल रहे विश्व के सबसे बड़े विमानन मेले दुबई एयर शो में सिर्फ तेजस ही नहीं, बल्कि इससे पहले पाकिस्तान, चीन, अमेरिका और खुद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत कई देशों के प्लेन क्रैश हो चुके हैं। इसमें चीन द्वारा निर्मित पाकिस्तान का चेंगदू J-10C फाइटर जेट, सऊदी अरब का बोइंग 737-800, रूस का सुखोई एसयू-27, अमेरिका के एफ-16 जैसे फाइटर जेट शामिल हैं।
कब हुआ पहला हादसा
सबसे पहले इस एयर शो में 2019 में पाकिस्तान एयर फोर्स का चेंगदू J-10C फाइटर जेट प्रदर्शन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह चीन द्वारा बनाया गया था। दुबई एयर शो हर दो साल में आयोजित होता है। इसमें विश्व की सबसे बड़ी विमानन कंपनियां प्रदर्शनी में हिस्सा लेती हैं। दुबई के अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लाखों दर्शकों के बीच उन्नत जेट्स, ड्रोन और एरोबैटिक्स का प्रदर्शन होता है, लेकिन इसकी चमक के पीछे दुर्लभ, लेकिन गंभीर दुर्घटनाओं का साया भी है। 2025 के संस्करण में भारतीय वायुसेना के स्वदेशी तेजस फाइटर जेट के क्रैश ने फिर याद दिला दिया कि एयर शो में जोखिम हमेशा बरकरार रहता है। हालांकि, 39 वर्षों के इतिहास में कुल क्रैश की घटनाएं उंगलियों पर गिनी जा सकती हैं, जो इस आयोजन की सुरक्षा मानकों की मजबूती को दर्शाता है।
पहले हादसे में क्रैश हुआ था पाकिस्तान का फाइटर जेट
दुबई एयर शो के पहले प्लेन क्रैश में पाकिस्तान का फाइटर जेट गिरा था। यह सबसे चर्चित हादसा था, जो 2019 में हुआ। 18 नवंबर को, पाकिस्तान एयर फोर्स का चेंगदू J-10C फाइटर जेट प्रदर्शन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह जेट चीन द्वारा निर्मित था और पाकिस्तान को पहली बार आपूर्ति किया गया था। पायलट ने इजेक्ट किया, लेकिन विमान दुबई के रिहायशी इलाके में गिरा, जिससे एक बच्चे की मौत हो गई। हादसे में विमान के मलबे ने एक घर को नुकसान पहुंचाया। जांच में तकनीकी खराबी और पायलट त्रुटि को जिम्मेदार ठहराया गया। यह दुबई एयर शो का पहला घातक हादसा था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल पर बहस छेड़ दी। पाकिस्तान ने इसे 'ट्रेजिक इंसिडेंट' बताते हुए माफी मांगी, जबकि दुबई अथॉरिटीज ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया।
अन्य विमान हादसे
पाकिस्तान के प्लेन क्रैश से पहले एक छोटा विमान हादसा 2017 के शो में भी हुआ था। सऊदी अरब की सलाम एयरलाइंस का बोइंग 737-800 विमान, जो स्टैटिक डिस्प्ले के लिए खड़ा था, अचानक इंजन फेलियर के कारण फिसला और आसपास के विमानों से टकराया। हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन आयोजन को कुछ घंटों के लिए रोका गया। सऊदी टीम ने इसे 'माइनर टेक्निकल फॉल्ट' बताया। इससे पहले, 2009 में रूसी नाइट्स एरोबैटिक टीम का सु-27 फ्लैंकर जेट प्रदर्शन के दौरान कंट्रोल खो बैठा, लेकिन पायलट ने इमरजेंसी लैंडिंग कर ली। विमान रनवे पर ही रुक गया, कोई नुकसान नहीं।
अमेरिका का एफ-16 भी हो चुका है हादसे का शिकार
दुबई एयर शो में इससे पहले अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन का 2015 में F-16 फाइटर जेट और 2013 में यूएई का खुद का F-16 लड़ाकू विमान प्रदर्शन के दौरान इंजन स्नैग का शिकार हुआ, लेकिन दोनों सुरक्षित उतरे। ब्रिटिश एरो लायनर का हॉक ट्रेनर (2007) में लो-लेवल फ्लाई के दौरान ब्रेक फेलियर हुआ, पायलट ने इजेक्ट किया। फ्रेंच डसॉल्ट मिराज (2011) और रूसी मिग-29 (1997) में भी मामूली इंसिडेंट्स रिकॉर्ड हैं, लेकिन क्रैश तक नहीं पहुंचे। ये हादसे दुबई एयर शो की सुरक्षा को चुनौती देते हैं, जहां हर फ्लाइट से पहले सख्त चेक होते हैं।
2025 के तेजस क्रैश के बाद, आईएएफ ने जांच शुरू की है, जो निगेटिव जी-फोर्स से जुड़ी हो सकती है। कुल मिलाकर, इन दुर्घटनाओं ने वैश्विक एयरोस्पेस इंडस्ट्री को सबक दिया। तकनीकी उन्नति के साथ सुरक्षा प्राथमिकता बनी रहे। दुबई शो अब भी इनोवेशन का प्रतीक है, लेकिन हर हादसा याद दिलाता है कि आसमान की ऊंचाइयों में खतरा छिपा है।