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G-20 देशों ने जारी किया 39 पन्नों का घोषणा पत्र, जानें हुए ऐसे कौन से ऐलान...जिस पर भड़क गया अमेरिका

जोहान्सबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन रविवार को समाप्त हो गया। जी-20 देशों ने इस दौरान 39 पन्नों का संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया। जिसमें प्रमुख वैश्विक मुद्दे समाहित रहे।

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Nov 23, 2025 01:19 pm IST, Updated : Nov 23, 2025 01:19 pm IST
जोहान्सबर्ग में जुटे जी-20 देशों के प्रतिनिधि।- India TV Hindi
Image Source : AP जोहान्सबर्ग में जुटे जी-20 देशों के प्रतिनिधि।

जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका): दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में शनिवार को जी-20 शिखर सम्मेलन संपन्न हो गया। इसके बाद जी-20 देशों ने 39 पन्नों का व्यापक घोषणापत्र जारी किया। इस घोषणा पत्र के कई ऐलानों को लेकर अमेरिका भड़क गया है। अमेरिका ने घोषणापत्र में रुकावटें डालने का प्रयास किया, लेकिन वह इसे रोक नहीं सका। घोषणा पत्र में वैश्विक चुनौतियों पर एकजुटता की प्रतिबद्धता जताई। इसमें बढ़ती भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा के प्रभाव को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है, साथ ही एकजुटता, समानता और स्थिरता को समावेशी विकास के प्रमुख स्तंभ बताया गया। 

 

अमेरिका को घोषणा पत्र से है क्या दिक्कत

जी-20 के घोषणापत्र में ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई, आपदा प्रतिक्रिया एवं लचीलेपन पर विशेष जोर दिया गया है। मेजबान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा की अध्यक्षता में आयोजित इस ऐतिहासिक सम्मेलन में 122 बिंदुओं वाला यह घोषणापत्र शासनाध्यक्षों द्वारा आम सहमति से अपनाया गया। हालांकि, अमेरिका ने अनुपस्थिति में इसमें अड़चन डालने का प्रयास किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बहिष्कार के कारण अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा नहीं लिया और व्हाइट हाउस ने इसे "जी-20 के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन" बताया। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने भी ट्रंप के समर्थन में बहिष्कार किया। जी-20 शिखर सम्मेलन  अफ्रीकी महाद्वीप पर पहली बार आयोजित हुआ।

 

घोषणा पत्र की प्रमुख बातें

घोषणा पत्र में कहा गया, "हम राष्ट्रों के वैश्विक समुदाय के रूप में अपने अंतर-संबंधों को समझते हैं। हम बहुपक्षीय सहयोग, वृहद नीति समन्वय, सतत विकास के लिए वैश्विक साझेदारियों और एकजुटता के माध्यम से यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं कि कोई भी पीछे न छूट जाए।" इसमें बढ़ते संघर्षों, युद्धों, असमानता और वैश्विक आर्थिक विखंडन के कारण उत्पन्न अनिश्चितताओं का उल्लेख करते हुए बहुपक्षीय सहयोग में विश्वास को रेखांकित किया गया। "हम इस चुनौतीपूर्ण राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक माहौल में साझा चुनौतियों का सामूहिक रूप से समाधान करने के लिए बहुपक्षीय सहयोग में अपने विश्वास को रेखांकित करते हैं।" 

क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को लेकर बड़ी बात

घोषणा पत्र ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों का पालन करने की अटूट प्रतिबद्धता जताई। रूस, इजरायल और म्यांमार का नाम लिए बिना उनका संदर्भ देते हुए कहा गया, "संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप सभी देशों को किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुता या राजनीतिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने और उनके क्षेत्रों का अधिग्रहण करने के लिए बल प्रयोग करने से बचना चाहिए। देशों को अन्य के साथ दोस्ताना संबंध विकसित करने चाहिए, जिसमें जाति, लिंग, भाषा या धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी के लिए मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं को बढ़ावा देना और प्रोत्साहित करना शामिल है।"


आपदा प्रतिक्रिया पर बड़ा ऐलान


आपदा प्रतिक्रिया और लचीलेपन पर फोकस करते हुए घोषणापत्र में उन देशों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई, जो पहले से ही आपदाओं से अत्यधिक प्रभावित हैं और अनुकूलन, आपदा न्यूनीकरण, तैयारी तथा पुनर्प्राप्ति की लागत वहन नहीं कर सकते। विशेष रूप से लघु द्वीप विकासशील देशों (एसआईडीएस) और अल्प विकसित देशों (एलडीसी) का उल्लेख किया गया। उच्च स्तर के ऋण को समावेशी विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए कहा गया कि यह कई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढांचा विकास, आपदा बचाव, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं में निवेश की क्षमता को सीमित करता है।

 

ऊर्जा सुरक्षा सहयोग और आर्थिक विकास भी एजेंडा

 जी-20 के घोषणा पत्र में ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय संप्रभुता, आर्थिक विकास, स्थिरता और वैश्विक समृद्धि के लिए मूलभूत आवश्यकता बताते हुए जी-20 नेताओं ने दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में विकसित 'स्वैच्छिक ऊर्जा सुरक्षा टूलकिट' की सराहना की। इसमें कहा गया, "यह टूलकिट विकासशील देशों के लिए विशेष प्रासंगिकता के साथ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, नवाचार, जोखिम पहचान, क्षेत्रीय अंतरसंबंध, बुनियादी ढांचा विकास, ऊर्जा की कमी, आपातकालीन तैयारी और कार्यबल विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने में मददगार है।"


सतत औद्योगिकीकरण को सतत विकास और ऊर्जा परिवर्तन की आधारशिला बताते हुए घोषणापत्र में औद्योगिकीकरण के लाभों के न्यायसंगत बंटवारे के लिए सतत औद्योगिकीकरण केंद्रों हेतु उच्च-स्तरीय स्वैच्छिक सिद्धांतों का समर्थन किया गया। इसके अलावा, आतंकवाद की निंदा, जलवायु कार्रवाई, एआई शासन, महिलाओं का सशक्तिकरण तथा डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की क्षमता पर जोर दिया गया।

 

पीएम मोदी के कई प्रस्तावों पर मुहर

 भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में भाग लिया और 'ड्रग-टेरर नेक्सस' के खिलाफ चार पहलों का प्रस्ताव रखा। रामाफोसा ने उद्घाटन में कहा, "हम अफ्रीकी जी-20 अध्यक्षता की गरिमा को कम नहीं होने देंगे।" यह घोषणापत्र ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं-जैसे जलवायु संकट से निपटने और ऋण राहत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, भले ही अमेरिकी बहिष्कार ने वैश्विक एकजुटता पर सवाल उठाए हों। सम्मेलन 23 नवंबर को समाप्त हो रहा है। (भाषा)

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